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परिषदीय स्कूल में डमी शिक्षक का खेल, सहायक अध्यापक की जगह पढ़ाती मिली युवती

बाराबंकी। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में कोरोना काल के बाद शिक्षकों के स्कूल पहुंचने की आदत में बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है। बीएसए की सख्ती व निरीक्षण में गैरहाजिर शिक्षकों के वेतन काटने के बाद भी शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है। स्कूलों के ताले जहां सुबह साढ़े नौ व दस बजे तक नहीं खुल रहे है। वहीं कई शिक्षकों के स्थान पर बेरोजगार युवक व युवतियां ड्यूटी कर रहे हैं।
सिद्धौर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कादीपुर में मंगलवार की सुबह साढ़े नौ बजे स्कूल में ताला लटक रहा था। स्कूल के बाहर रसोइयां सुनीता व बच्चे पीठ पर बैग लादे स्कूल का ताला खुलने का इंतजार कर रहे थे। इस स्कूल में जहां 205 बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं तीन शिक्षक व दो शिक्षामित्र तैनात हैं।

हालांकि यहां पर पौने 10 बजे पहुंचे शिक्षामित्र ने ताला खोला तो शिक्षकों का पहुुंचना शुरू हुआ। पूर्व माध्यमिक विद्यालय भेड़िया में सहायक अध्यापक चिंतामणि के स्थान पर एक युवती पढ़ाती मिली। पूछने पर उसने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। इंचार्ज प्रधानाध्यापक ने बताया कि सहायक अध्यापक ने पढ़ाने के लिए अपने स्थान पर पूजा सिंह को लगा रखा है।

वहीं प्राथमिक विद्यालय दुनौली, पूर्व माध्यमिक विद्यालय मेनहुआ, पलौली में भी कई शिक्षक गैरहाजिर दिखे। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी अजय गुप्त मौर्या ने बताया कि स्कूलों का निरीक्षण किया जा रहा है। शिकायत मिलने पर दोषियों पर कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट बीएसए को भेजी जाएगी।

रामनगर में भी साढ़े नौ बजे तक नहीं खुला ताला

रामनगर। रामनगर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय गर्री में मंगलवार की सुबह साढ़े नौ बजे तक ताला लटकता मिला। ऐसे में बच्चे स्कूल के बाहर खड़े होकर शिक्षकों का इंतजार करते रहे। यहां पर प्रधानाध्यापक पवन वर्मा समेत चार अध्यापक तैनात हैं। मगर, कोई नहीं आया था। इसको लेकर अभिभावकों में काफी आक्रोश है।

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