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इलाहाबाद हाईकोर्ट : सरकार से पूछा- चुनाव ड्यूटी के 31वें दिन मरने वाले को क्यों न माना जाए कोरोना संक्रमित

प्रयागराज : प्रदेश में पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से यदि चुनाव के तीस दिन बाद तक मौत हुई है तो ही उनको अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाएगा, राज्य सरकार द्वारा जारी इस शासनादेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। न्यायालय ने सरकार से यह पूछा है कि उसने यह कैसे तय किया कि चुनाव डयूटी करने के तीस दिन के भीतर जिनकी मौत हुई है, वे ही चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमित हुए थे। स्पष्ट करने को कहा की क्या 31 वें दिन मरने वाले को चुनाव में संक्रमित नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार सप्ताह में पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
हापुड़ के सुभाष चंद्र और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की पीठ ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता महेश शर्मा का कहना था कि प्रदेश सरकार ने एक जून को शासनादेश जारी कर पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले ऐसे सरकारी कर्मचारियों जिनकी ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से मृत्यु हो गई 30 लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया है। शासनादेश के प्रस्तर 12 में कहा गया है कि निर्वाचन ड्यूटी की तिथि से 30 दिन के भीतर कोविड से मृत्यु को ही अनु्ग्रह राशि के भुगतान के लिए पात्र माना जाएगा, जबकि सरकार ने इसी शासनादेश में खुद स्वीकार किया है कि कई प्रकार से टेस्ट में भी कई बार संक्रमण पकड़ में नहीं आता है संक्रमित होने की रिपोर्ट की तिथि को आधार नहीं बनाया जा सकता है।

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