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किसी मंडल ने नहीं दी केंद्रों की जांच रिपोर्ट, राजकीय और एडेड कॉलेजों को केंद्र न बनाने का मामला

किसी मंडल ने नहीं दी केंद्रों की जांच रिपोर्ट

कई बार मांगने के बावजूद चारों जिलों (प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़ और फतेहपुर) से केंद्र निर्धारण संबंधित अभिलेख नहीं मिल सके हैं। दो दिन का और मौका दिया है। अन्यथा की स्थिति में सूचना बोर्ड मुख्यालय को भेज दी जाएगी। -आरएन विश्वकर्मा, उप शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल

● राजकीय और एडेड कॉलेजों को केंद्र न बनाने का मामला
● मंडलीय उप शिक्षा निदेशकों को जांच कर देनी थी रिपोर्ट


प्रयागराज, यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए केंद्र बनाने में हुई गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट किसी मंडल से नहीं मिली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने प्रदेश के सभी मंडलीय उप शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर राजकीय और एडेड कॉलेजों को परीक्षा केंद्र न बनाने की जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट 30 तीस जनवरी तक यूपी बोर्ड के सचिव को भेजने के आदेश दिए थे। लेकिन समयसीमा बीतने के बावजूद प्रदेश के 18 में से किसी भी मंडल ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। ऐसे में मंडलीय उप शिक्षा निदेशकों पर भी कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई है।

सचिव दिब्यकांत शुक्ल का कहना है कि किसी मंडल से जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। 2024 की परीक्षा के लिए बोर्ड मुख्यालय से ऑनलाइन 7884 केंद्र बनाए गए थे। इनमें प्रदेश के 1017 राजकीय इंटर कॉलेज और 3537 अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेज भी शामिल थे। इन केंद्रों का चयन छह सितंबर 2023 को शासन की ओर से जारी केंद्र निर्धारण नीति के तहत खास सॉफ्टवेयर से किया गया था। सॉफ्टवेयर से निर्धारित केंद्रों की सूची जब जिला स्तरीय समिति को भेजी गई तो पूरे प्रदेश में 1017 राजकीय इंटर कॉलेजों में से 461 और 3537 एडेड कॉलेजों में से 58 को बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं केंद्रों की संख्या 7884 से बढ़ाकर 8265 कर दी गई। सरकार की आर्थिक सहायता से चलने वाले इन दोनों श्रेणी के कॉलेजों को इतनी बड़ी संख्या में केंद्र सूची से बाहर करना चौंकाने वाला था, क्योंकि केंद्र निर्धारण नीति में स्पष्ट प्रावधान था कि पहले राजकीय फिर एडेड कॉलेजों को केंद्र बनाया जाएगा। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने पिछले दिनों केंद्र निर्धारण में की गई गड़बड़ियों पर ‘नीति नई, नीयत पुरानी’ टैगलाइन से समाचार प्रकाशित किया था। इसके तहत राजकीय और एडेड कॉलेजों को केंद्र सूची से बाहर करने सहित केंद्र निर्धारण में हुई अन्य गड़बड़ियों को उजागर किया गया था।

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