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मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर सहानुभूतिपूर्वक हो विचार: हाईकोर्ट

मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर सहानुभूतिपूर्वक हो विचार: हाईकोर्ट


इलाहाबाद : मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति के लिए पांच साल बाद हुए आवेदन को खारिज करने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुचित ठहराया है।
कोर्ट ने कहा है कि आश्रित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए आवेदन में देरी को माफ किया जाना चाहिए। कोर्ट ने बीएसए औरैया के आदेश को रद करते हुए छह सप्ताह में नए सिरे से आदेश पारित करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि नियत समय के भीतर आदेश नहीं दिया जाता है तो वह प्रतिदिन की जाने वाली देरी के लिए एक हजार रुपये हर्जाने का भुगतान याची को करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय मनी कोठी औरैया में सहायक अध्यापक रहे स्व. करोड़ी लाल के पुत्र महादेव प्रसाद शाक्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका में कहा गया है कि पिता की मृत्यु के समय याची 12 साल का था। 2012 में बालिग होने पर उसने नियुक्ति की अर्जी दी। जिसे बीएसए ने पांच साल देरी से दाखिल करने के कारण निरस्त कर दिया। बीएसए के इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याची का कहना है कि वह मजदूरी जीवन यापन कर रहा है और अपनी बीमार मां की देखभाल कर रहा है। इस स्थिति के बावजूद बीएसए ने अर्जी पर विचार नहीं किया।1कोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली 1974 में 2014 में नियम पांच में संशोधन कर व्यवस्था दी गई है कि आर्थिक स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर अर्जी देने में देरी माफ की जा सकती है।
कोर्ट ने शिवकुमार दुबे केस के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामले में उचित और सौम्यतापूर्ण ढंग से विचार कर निर्णय लिया जाए।

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