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यूपी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, उजागर हुए तथ्य:- झारखंड के 50 और यूपी के 41 फीसद स्कूलों में शिक्षकों का अभाव, ये हैं आरटीई के मानक

यूपी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, उजागर हुए तथ्य:- झारखंड के 50 और यूपी के 41 फीसद स्कूलों में शिक्षकों का अभाव, ये हैं आरटीई के मानक:




स्कूली शिक्षा को मजूबत बनाने के बड़े-बड़े दावे तो हो रहे हैं, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जिसमें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं हैं।

बिहार में यह स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है जहां सबसे ज्यादा करीब 68 फीसद ऐसे प्राथमिक स्कूल हैं जिनमें शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तय मानकों के मुताबिक शिक्षक नहीं हैं। झारखंड में ऐसे प्राथमिक स्कूलों की संख्या 50 फीसद और उत्तर प्रदेश में 41 फीसद है। उच्चतर प्राथमिक स्कूलों में यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। बिहार में ऐसे करीब 78 फीसद, झारखंड में 64 फीसद और उत्तर प्रदेश में 42 फीसद स्कूल हैं। स्कूली शिक्षा की यह बदहाली संसद को हाल ही में दी गई एक जानकारी में सामने आई है। यह स्थिति तब है जबकि स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए केंद्र की ओर से राज्यों को हर साल मदद दी जाती है। इनमें आरटीई नियमों के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को पूरा करने के लिए भी पैसा दिया जाता है। इसके साथ ही राज्यों को समय-समय पर शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। रिपोर्ट में देश के जिन अन्य राज्यों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है उनमें राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्य भी शामिल हैं। इन राज्यों में आरटीई के तय मानकों के तहत करीब 25 फीसद से ज्यादा स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं।

गुजरात की स्थिति सबसे अच्छी : इस मामले में गुजरात की स्थिति सबसे बेहतर है। वहां सिर्फ नौ फीसद ही ऐसे प्राथमिक स्कूल हैं जहां आरटीई मानक के तहत शिक्षक नहीं हैं। उच्चतर प्राथमिक स्कूलों में भी यह स्थिति बाकी राज्यों के मुकाबले काफी अच्छी है। इनमें सिर्फ 14 फीसद ही ऐसे स्कूल हैं जहां तय मानक के मुताबिक शिक्षक नहीं हैं।

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