शिक्षामित्र गुरुजनों और बीटीसी भाइयों के लिए समर्पित ये पोस्ट ,कृपया समय निकालकर जरूर पढ़ें। 🙏🙏🙏🙏

पोस्ट काफी लंबी हो गयी है ,समय जब भी मिले जरूर पढ़ें।
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आज का सन्देश खासतौर से 68500 शिक्षक भर्ती में रिक्त पदों की लड़ाई लड़ने वाले निराश साथियों के
साथ ही साथ 69000 शिक्षक भर्ती में अपनी आखिरी उम्मीद देखने वाले अभ्यर्थियों के लिए ,
69000 की लड़ाई लड़ने वाले बहुत ही सावधानी के साथ एक एक कदम बढ़ाना क्योंकि हर कदम पर कांटे ही काँटे हैं ,हर मोड़ पर धोखा है जरा बच बचकर चलने की जरूरत है।
क्योंकि आपकी एक छोटी सी लापरवाही न जाने कितनों के सपनों पर भारी पड़ जाएगी खासतौर से हमारे अधेड़ उम्र के शिक्षामित्र भाई बहनों पर जिनके लिए ये आखिरी मौका है ।
अतः सावधानी हटी दुर्घटना घटी का खास ख्याल रखते हुए आगे की लड़ाई लड़ें।
हर हार की कमियों की समीक्षा करते हुए ही जीत का मार्ग प्रशस्त होता है।
✍वक्त से लड़कर
जो नसीब बदल दे !!
इन्सान वही जो
अपनी तक़दीर बदल दे !!
कल क्या होगा
कभी मत सोचो !!
क्या पता कल वक्त खुद
अपनी तस्वीर बदल दे !! 💐💐
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जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है।
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संघर्ष का दामन अंतिम आस तक नहीं छोड़ना चाहिए,
इस भर्ती में खोने को कुछ नहीं जो भी है पाने को ही है
अतः अंतिम आस तक कोशिश पिछली हार में जो कुछ कमियां रह गयी हो उसकी समीक्षा करते हुए आगे की लड़ाई को लड़ने का दृढ़संकल्प होना चाहिए तभी कोई न कोई रास्ता निकलेगा ।
👉सरकार के साथ सामंजस्य बनाते हुए ही आगे की लड़ाई लड़नी चाहिए क्योंकि हर कोर्ट में इनकी ही मनमानी चलने वाली है अतः सच्चाई को स्वीकार कर आगे बढ़ते रहना ही जिंदगी है।
पर अपने साथ हुए इस धोखे को कभी न भूलना और उचित समय मे उचित सजा इन अहंकारियों को जरूर सब मिलकर देना क्योंकि इन्होंने जानबूझकर अपनी गलतियों को छुपाने के लिए 26000 खाली पदों के साथ धोखा किया वो भी कोर्ट की आड़ में ।
हारना नहीं 68500 में बची सीटों के दावेदारों (सरकार की साजिश यही है कि इन सीटों को शिक्षामित्रों और बीटीसी की आपसी लड़ाई का फायदा उठाकर बीएड वालों को मलाई खिला दें या अगली भर्ती में इसे जोड़ दें)
👉क्योंकि इसी हार में जीत का मंत्र छुपा है क्योंकि अगर मूल विज्ञापन ही मान्य है तो फिर उस मूल विज्ञापन की अभी तक तो न जाने कितनी बार धज्जियाँ उड़ चुकी है ,चाहे वो बाहरी लड़के हो या ओवर राइटिंग वाला मैटर हो या बहुत कुछ और ???
तरीके से मूल विज्ञापन की समीक्षा और उसके बाद हर बदलाव पर लगी मुहर को भी नजर में रखते हुए आगामी लड़ाई लड़ें जीत झक मार कर आएगी।
संयमित और सँगठित होकर लड़ाई लड़ने की अब जरूरत हैं।
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मेरी ही एक पुरानी पोस्ट आपके समक्ष फिर प्रस्तुत कर रहा हूँ क्योंकि फिर वही (शिक्षामित्रों+बीटीसी साथियों जिनको वास्तव में नौकरी करनी हो) एकता का अभाव 68500 भर्ती के बचे हुए सीटों पर हार दिला गया ।
#Saveupshikshamitra
आज का सन्देश खासतौर से बीटीसीधारी साथियों के लिए
और
हमारे शिक्षामित्र गुरुजनों के लिए
समय निकालकर जरूर पढ़ें
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बहुत बहुत बधाई हो बीटीसी भाइयों को ,
आप सबकी अदूरदर्शिता की वजह से अब बीएड वाले प्राथमिक में एंट्री लेकर जो पहले से ही tgt, pgt, nvs, kvs, jrf, phd हर तरह की परीक्षा और भर्ती के लिए एलिजिबल थे उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए सरकार ने प्राथमिक शिक्षण में जबरन घुसाया जिसका कोई औचित्य ही नहीं था क्योंकि प्राथमिक के लिए खासतौर से उत्तरप्रदेश में 5 लाख अभ्यर्थियों की जमात पहले से ही बीटीसी बेरोजगार बैठे है और कई लाख औऱ लाइन में है जिनको सिर्फ और सिर्फ प्राथमिक शिक्षा में शिक्षण के लिए योग्य माना गया है जब बीएड वालों की भीड़ में अब बीटीसी की प्रतिभा किस तरह कुचली जाएगी अब आगे सब सामने आएगा ही।
जिन शिक्षामित्रों के लिए बीटीसी वालों ने योग्य अयोग्य का तांडव कर ये नौटंकी शुरू किए थे ,
शिक्षामित्रों से डाह के चक्कर मे खोदे गए गड्ढे में अब खुद बीटीसी वाले गिर कर अपना भविष्य चौपट करने का पूरा इंतजाम करवा बैठे ,
जो व्यक्ति समय रहते अपने हक़ के लिए संघर्ष नहीं कर पाता है उसका परिणाम यही होता है कि आपके हक़ को दो लोगों की लड़ाई में तीसरा पूरा मलाई चट कर लेता है और जब तक आपको होश आता है तब तक सब कुछ खत्म हो गया रहता है।वही हुआ बीटीसी वालों के साथ !
जिन शिक्षामित्रों को बीटीसी वालों ने अयोग्यता का अपमान का घूंट पिलाया अब वो घुट बीएड वालों से पीने को अब तैयार रहना क्योंकि प्राथमिक शिक्षा में पिछले 19 वर्षों से जिन शिक्षामित्रों ने अपने खून पसीने से बंद पड़े विद्यालयों को खोलकर आज इस स्थिति में पहुंचाया कि आज उन्ही के द्वारा सुरक्षित किये सीटों पर अपना अपना हक जमाने अब आज के युवा प्रतियोगिता के बीएड बीटीसी के छात्र अपने माता पिता के उम्र के शिक्षामित्र गुरुजी से प्रतियोगिता कर उन्हें समाज मे अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं जबकि प्रतियोगिता का मजा तब आता है जब प्रतियोगी हमउम्र का हो तो प्रतियोगिता का मजा भी कुछ और ही होता है जो अब बीएड बीटीसी जब आगे की भर्तियों में चूहे बिल्लियों का खेल खेलेंगे तब समझ मे आएगा योग्य और अयोग्य का खेल।
शिक्षामित्रों का क्या ज्यादातर शिक्षामित्र उम्र के ढलान पर है ज्यादातर 35 से 55 वर्ष के हो चुके हैं जिन्होंने जवानी के महत्वपूर्ण 19 वर्ष इसी प्राथमिक शिक्षा में अपना जीवन बिताया फिर भी आज उन्हें उन्ही के सजाए आशियानों से बेदखल करने की जो साजिश आज सरकार ,अधिकारी और कुछ चमन चूतिये टाइप के बीटीसी के नेताओं के माध्यम से की जा रही है जो किसी भी सूरत में न्याय की पराकाष्ठा पे खरा नही उतरता ,
शिक्षामित्र को अपमानित करने की हर कोशिश की गई उनको मिले दो मौके जिसके तहत 68500 और 69000 कि भर्ती जो हो रही है उसमें कितने छेद हैं और शिक्षामित्र समाज को अपमानित करने के लिए जो दांवपेंच अपनाए जा रहे हैं उन्हें खुद कभी गम्भीरता से सोचना की क्या उचित क्या अनुचित था या है ?
जंहा तक कुछ लोग कहते है कि शिक्षामित्रों ने प्राथमिक शिक्षा के स्तर को गिरा दिया है उन महानुभावो से एक सवाल अगर उत्तरप्रदेश में 170000 शिक्षामित्र नियुक्त थे तो 3 लाख से ज्यादा रेगुलर शिक्षक भी तो थे आखिर उनका क्या दायित्व था जो शिक्षामित्रों से 10 गुना वेतन और सुबिधा पाते थे ?
क्या उनका कोई दायित्व नहीं था कि वो भी इस गिरते स्तर को सुधारें ?
क्या उन्हें तनख्वाह केवल brc और bsa आफिस में चमचागिरी करने के लिए दी जाती थी ?
अगर शिक्षामित्र दोषी हैं तो वो सारे शिक्षक भी दोषी हैं
अगर शिक्षामित्र अयोग्य है तो वो सब रेगुलर शिक्षक भी अयोग्य की श्रेणी में ही आएंगे जिन्होंने शिक्षा के गिरते स्तर को शिक्षामित्रों के साथ सुधारने के बजाय विद्यालय के चौराहों पर नेतागिरी करना ज्यादा बेहतर लगा ,
वो भी टेट सुपर टेट पास नहीं थे ,
उसमे भी बहुत लोग इंटर बीटीसी ही नियुक्त है ,
शिक्षामित्र तो स्नातक बीटीसी भी हैं 19 वर्षो का अनुभव भी है 40 हज़ार से ज्यादा टेट पास भी हैं फिर भी उनका इतना अपमान ये बात कुछ हजम करने वाली नहीं है पर कोई करे क्या ?
जब गलत को सही और सही को गलत साबित करने की नीयत ही हो जाये फिर क्या सफाई देने की जरूरत ?
प्रतियोगिता का तो मजा तब आता कि जबसे शिक्षामित्र नियुक्त हुए उसके साथ नियुक्त जितने भी शिक्षक हैं उन सबकी एक सुपरटेट परीक्षा होती और फिर परिणाम आता फिर समाज की आंखे फ़टी की फटी रह जाती कि कौन योग्य और कौन अयोग्य है और कौन गिरते शिक्षा के स्तर का जिम्मेदार था या है
पर अफसोस दुश्मनी और साजिश सिर्फ शिक्षामित्रों से ही निकली गयी जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं था ।
ईश्वर से यही कामना की आज जिस दौर से शिक्षामित्र गुजर रहा है खुदा न करे आज के 20 साल बाद आज नियुक्त शिक्षकों के साथ ऐसी
अनहोनी हो और उस वक़्त के प्रतियोगी बच्चों के साथ प्रतियोगिता करवाकर उनकी योग्यता की परख की जाएगी तब शायद शिक्षामित्रों के दर्द का अहसास होगा।
ईश्वर न करें ऐसी घटना किसी के साथ दुहराई जाए ।
अब आगे की भर्तियों में आप सभी बीटीसी बीएड वाले बच्चों को किसी शिक्षामित्रों से पाला नहीं पड़ेगा ,खुश रहना मस्त रहना और जिस जिम्मेदारी जिस दायित्व को निभाने के लिए शिक्षामित्रों का अपमान कर उनके ही द्वारा बचाये पदों पर नियुक्त होकर अब बेसिक शिक्षा के स्तर को सुधारने की जुगत में जा रहे हो उस दायित्व को ईमानदारी से पूरा करना और समाज के गरीब तबके के बच्चों के उत्थान के लिए हर जतन करना क्योंकि शिक्षामित्र सीमित संसाधनों में जितना हो सका अपने औकात से ज्यादा कोशिश किये फिर भी आप सब मिलकर समाज में अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़े अब जब खुद आओगे इस विभाग में तब पता चलेगा कि बाहर रहकर सुधार करवाने में और अंदर आकर कुर्सी पर बैठकर सुधार करवाने में कितना अंतर होता है ?
और तब ज्यादा एहसास होगा जब आप सुधार करना चाहोगे पर आपके ऊपर के लोग आपके काम में टांग अड़ाकर उलझाएंगे यही हुआ है आज तक शिक्षामित्रों के साथ भी
खैर जो हुआ सो हुआ अब आप सब न कि सिर्फ तनख्वाह की चाहत में ही सिर्फ न रहना बल्कि गरीब बच्चों के जीवन से खिलवाड़ भी न करना ,अपने काम को ईमानदारी और जिम्मेदारी से कर अपनी तूफानी योग्यता का परिचय देना ।
आप सब आगे बढ़ो और जीवन मे तमाम उचाईयों को छुओ पर कभी भी किसी शिक्षामित्रों का अपमान करने का अपराध न करना क्योंकि उन्होंने ने भी बहुत ही अल्प मानदेय में अपने जीवन के बहुमूल्य 19 वर्ष उसी बेसिक शिक्षा को दिया जंहा आप सब अपने सपनों को सजाओगे उनके सपनों को तोड़कर ये भर्तियाँ 2000 से ज्यादा शिक्षामित्रों की जलती चिताओं पर हो रही है लाखो शिक्षामित्रों के बिखरते अरमानो पर हो रही है मुझे ये तो नहीं पता कि आपको और इस सरकार के लिए ये भर्तियां फलीभूत होंगी कि नहीं पर इतना जरूर है कि ये जो शिक्षामित्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर ये घिनौना खेल खेला गया है उसकी आंच सबके जीवन को निश्चित ही उलझाए रखेगी ये भी लिख कर आप सब रख लेना।
बाकी बीटीसी के ही कुछ विभीषणों ने अपने ही जमात के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर बैठे इन बीएड वालों को अपने लिए बनाए सीटों में भरने की सिफारिश कर वो भी मात्र शिक्षामित्रों को नीचा दिखाने के चक्कर मे ।
अब ताउम्र झेलोगों इनको
मुबारकबाद हो उज्जवलमय भविष्य के लिए ।
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ये दोनों वीडियो एक में 68500 के संघर्षों और शिक्षामित्र गुरुजनों के हुए धोखे की झांकी भर है
दूसरे में शिक्षामित्रों के असहनीय दर्द का दुःखद चित्रण है
आंख खोलकर खुद भी देखें और औरों को भी जागरूक करें।

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