#Shikshamitra लगातार कई काबिल लोगों की शिक्षामित्रों के बारे में, उनका समर्थन करने के बजाय नकारात्मक बातें की जा रही हैं...। मैं उनको उनकी काबिलियत पर शक न करते हुए वास्तविकता के धरातल पर ले जाना चाहता हूं.....
1. सन 2000 से पहले शिक्षक बनने हेतु qualification intermediate ही थी, उसी आधार पर इनको शिक्षा विभाग में लेकर, ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर सबसे योग्य अभ्यर्थी को मेरिट द्वारा चयनित करके शिक्षा विभाग को संजीवनी देने का काम इन शिक्षामित्रों द्वारा किया गया।
2. उस समय के हिसाब से ये योग्य थे, मानदेय केवल 2250 रुपये।
3. 1998 से पहले जो शिक्षक नियुक्त हुये थे वो highschool पास ही थे। और मिनिमा के नाम का प्रशिक्षण करते थे ।
4. आज जिस B. Ed. की डिग्री का राग अलाप कर शिक्षामित्रों को अयोग्य बताया जा रहा है, वह हायर एजुकेशन के लिए एवं TGT की परीक्षा में शामिल होने के लिए थी।
5. शिक्षामित्रों को लगाने के बाद भी जब शिक्षकों की भारी कमी से विभाग जूझा तो B. Ed. योग्यताधारी अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजित किया गया।
6. आज शिक्षामित्र यदि समायोजित किये गए तो उनको RTE के तहत ज़रूरी BTC प्रशिक्षण ग्रेजुएशन कराने के बाद ही ऐसा किया गया।
7. यदि इनको TET ज़रूरी है तो इस पर तत्कालीन सरकारी मशीनरी को ठोस नियमावली बनानी चाहिए थी।
8. तय करिये दोष सरकार का है या शिक्षामित्रों का।
9. यदि इनकी नियुक्ति की तिथि को आधार नही बनाया गया है तो, TET को 2013 से लागू न करके सन 2000 के बाद जो भी शिक्षा विभाग की नियुक्तियां हैं...सब पर लागू किया जाना चाहिए....सबकी काबिलियत का अंदाज़ा लग जायेगा।
10. इनकी नियुक्तियों से पहले highschool एवं intermediate का रिजल्ट 20% रहता था....जबकि आज 100%.....ऐसे में उस समय अपने गांव या न्याय पंचायत के सबसे काबिल अभ्यर्थी की योग्यता पर शक करना गलत है।
11. शिक्षामित्रों ने कभी ये नहीं कहा कि B. Ed. को विभाग में मत लो, जबकि ये डिग्री higher education के लिए है....लेकिन बी.एड. वाले शिक्षामित्रों को अपना शत्रु मानते हैं।
12. आपके हिसाब से तो केवल बी.एड. ही बेसिक में लगने चाहिए तो डी.एल.एड. और बी.एल.एड. के courses का भी विरोध दर्ज कराइये।
13. विगत TET का रिजल्ट 20% तक पहुंचना मुश्किल हो गया.....काबिलियत कहाँ घुस गई....।
14. अपने जीवन के कीमती 18 साल इस प्रतिबंध के साथ विभाग को दिए कि इस दौरान कोई और काम या कहीं और नौकरी नहीं करेंगे।
15. 2009 के बाद शिक्षामित्रों की कोई नई नियुक्ति नहीं की गई...आज एकदम से इनको हटाना कहाँ उचित है।
16. बी.एड. योग्यताधारी इतने योग्य हैं तो TGT क्यों नहीं निकाल पाते, शिक्षामित्रों का TET निकालने का प्रतिशत TGT निकालने के प्रतिशत से ज्यादा है।
17. 3500 में योग्य थे 30000 में अयोग्य हो गए।
18. यदि शिक्षामित्रों को न लगाया जाता तो बेसिक शिक्षा का निजीकरण हो गया होता और आज आप बोलने लायक नहीं होते.........।
19. कोई वकील 8 से 10 वर्ष वकालत करके जज बन सकता तो शिक्षामित्र सहायक अध्यापक क्यों नहीं बन सकता ? क्या यह नियम विरुदद्ध नहीं है ?
20. N CETकी गाईड लाइन आज भी शिक्षक बनने के लिए इण्टर बीटीसी है हम राज्य और केन्द्र दोनो के मनक पूरा करते हैं , रही बात टी.ई.टी. की तो हम इसके दायरे आते ही नहीं क्योंकि हम NCET के पत्र के अनुसार अनट्रेंड टीचर कीश्रेणी में आते हैं ।
और 2010 के पूर्व नियुक्त हैं ।
21. रही बात योग्य अयोग्य की तो 72825 की भर्ती में तो सफेदा पोतकर पास है इस फर्जीवाड़े में तो सचिव स्तर के अधिकारी आज भी जेल में है । इतना ही नहीं इनके प्रशिक्षण के लिए राज्य अनुमति ही नहीं इसपर कोर्ट ने सुनने से ही इन्कार कर दिया ये कैसा न्याय है ?
22. उपरोक्त बातें कहने का मतलब केवल इतना है कि माननीय न्यायालय को निर्णय लेते समय विचार करना चाहिए था ।
23. 12वाँ, 15वाँ, 16वाँ संशोधन भी माननीय उच्च न्यायालय से निरस्त और अल्ट्रावायलेट था पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने उसे सही माना जबकि यह संशोधन भी आखिर राज्य सरकार ने ही किया था तो फिर
24. टीईटी 2011 जो सफेदा पोतकर पास हुए वह सहायक अध्यापक हैं और सफेदाचोरी में संजयमोहन जेल में गया लेकिन टेट 2011निरस्त नहीं हुआ क्यों ?
25. माननीय सुप्रीम कोर्ट के एक ही आदेश से शिक्षामित्रों समायोजन निरस्त हुआ और बी.एड. की प्राइमरी में इंट्री दोनो अबैध किया गया लेकिन बीएड. को शिक्षामाफियों को संरक्षण देने वाली सरकार ने बी.एड. को पुनः प्राइमरी में शामिल कर लिया और शिक्षामित्रों को अपमानित करके मरने के लिए छोड़ दिया । जिस अपमान से लगभग 2500 शिक्षामित्रों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली
26. सुप्रीम कोर्ट के एक ही आदेश का अनुपालन दो तरह से कैसे ? बीएड. शामिल और शिक्षामित्र बाहर ।क्या यह कोर्ट के आदेश की अवमानना नहीं है ?
27. 68500की भर्ती सीबीआई जाँच के दायरे में है लेकिन इतनती धाँधली के बावजूद भर्ती निरस्त क्यों नहीं होती ?
28. बीएड. वाले इतने ही योग्य हैं तो माध्यमिक में क्यों नहीं जाते वहाँ उनकी काबीलियत की पोल खुल जाने का डर है ।
30. उ.प्र. और उत्तराखंड दोनो ही राज्योंमें एक ही शासनादेश से शिक्षामित्रों नियुक्ति हुई है लेकिन हमारे देश मे सुप्रिमकोर्ट का रुख अलग अलग हैं
केवल शिक्षामित्रों के लिए किया गया संशोधन अवैध बाकी सब सही ।
ये मेरी निजी राय है...

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