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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों की शुल्क वृद्धि के खिलाफ दाखिल याचिका को किया खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र स्कूल (फीस नियमन) एक्ट 2018 की धारा 3(3) ए (iv) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग में दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। यह धारा प्राइवेट स्कूलों को कंपोजिट फीस लेने की छूट देती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल व न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ ने नोएडा की अभीष्ट कुसुम गुप्ता की जनहित याचिका पर दिया है। सरकारी अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा का कहना था कि याची स्वयं पीड़ित है। उन्होंने छिपाया है कि उसका बच्चा भी निजी स्कूल में पढ़ता है और उन्हें फीस जमा करने के लिए बाध्य किया गया है।



गौरतलब है कि निजी स्कूलों द्वारा शुल्क वृद्धि को लेकर सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करने तथा निजी स्कूलों के शुल्क निर्धारण को लेकर बने कानून की वैधता को याचिका में चुनौती दी गयी थी। याची का कहना था कि प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा ने 7, 21 और 27 अप्रैल को अधिसूचना जारी किया था। अधिसूचना में सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिया है कि कोई भी स्कूल कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन की वजह से बढ़ी फीस न वसूले और न ही अभिभावकों को त्रैमासिक शुल्क जमा करने पर बाध्य किया जाएगा। इसके बावजूद स्कूलों द्वारा जबरन फीस जमा करायी जा रही है। कोर्ट ने याचिका को गलत तथ्यों पर दाखिल करने के कारण खारिज कर दी है।

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