69000 शिक्षक भर्ती मामले में डेड़ महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन सही मायनों में जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। बिवेचना में जुटी एसटीएफ मामले में बांछित नकल माफिया चंद्रमा सिंह यादव ब गिरोह के सक्रिय सदस्य मायापति दुबे का कोई सुराग हासिल नहीं कर सकी है। कोर्ट बंद होने के कारण अन्य कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। जिससे मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह से संबंधित मामले की विवेचना 9 जून को एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी।
इससे पहले सोरांब पुलिस गिरोह के सरगना केएल पटेल समेत 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। एसटीएफ में विबेचना शुरू करते ही मामले में फरार चल रहे नामजद आरोपी मायापति दुबे के साथ ही नकल माफिया चंद्रमा सिंह यादव व प्रतापगढ़ के दुर्गेश सिंह की तलाश शुरू की। जिले में उनके हर संभावित ठिकानों के साथ ही आसपास के जनपदों में भी सुरागकशी कर कई जगहों पर दबिश दी। लेकिन नतीजा सिफर रहा। ना तो पूर्व में टीईटी में सेंधमारी की कोशिश के आरोप में पकड़े गए नकल माफिया चंद्रमा का कोई सुराग मिला, ना ही 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा मैं शेर मारी करने वाले नकल गिरोह के सरगना केएल पटेल के सबसे खास कारिंदे भट्ठा संचालक मायापति के बारे में कोई जानकारी मिली। ऐसे में डेढ़ महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी एसटीएफ की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है जिससे मामला ठंडे बस्ते में जाता भी नजर आ रहा है।
क्या कहते हैं एसटीएफ के अफसर
डेढ़ महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने से भले ही सवाल उठ रहे हों, लेकिन एसटीएफ अफसर ऐसा नहीं मानते। एसटीएफ स्थानीय इकाई के प्रभारी एएसपी नीरज पांडे कहते हैं, यह सहो है कि फरार आरोपियों को अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। लेकिन विवेचना के स्तर पर जो भी कार्रवाई जरूरी होती है, वह लगातार चल रही है। फिलहाल न्यायालय बंद है ऐसे में एलबीडब्ल्यू समेत अन्य कार्रवाई लंबित है। कोर्ट खुलते ही किसके लिए अर्जी दी जाएगी। जबकि फरार आरोपियों की तलाश में टीमें लगी हुई हैं।


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