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Basic Shiksha News : रिटायरमेंट की उम्र में देना पड़ रहा योग्यता का सुबूत, फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जांचे जा रहे डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के प्रपत्र

कानपुर : बेसिक शिक्षा में पकड़े गए फर्जी शिक्षकों के कारण शिक्षा विभाग अब सभी के प्रपत्र जांच रहा है। अब डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच भी की जा रही है। इसमें ऐसे विभागाध्यक्षों व एसोसिएट प्रोफेसरों से उनके प्रपत्रों का ब्योरा मांगा जा रहा है जो सेवानिवृत्त होने वाले हैं कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने ऐसे अनुभवी शिक्षकों की दोबारा जांच कराए जाने पर नाराजगी जताई है।


शिक्षक संघ ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है कि जब एक बार डिग्री कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रपत्रों का सत्यापन हो चुका है तो दोबारा कराने को क्यों कहा जा रहा है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के विभागाध्यक्षों व एसोसिएट प्रोफेसरों को इस प्रकार दौड़ाना गलत है। विश्वविद्यालय से संबद्ध 51 सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं, जिनमें ढाई हजार शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इसमें शहर में 21 कॉलेज संचालित हैं।

प्राथमिक स्कूल के फार्मूले को डिग्री कॉलेजों में कैसे लगाया जा सकता है। कॉलेज में पढ़ाते हुए 32 वर्ष हो चुके हैं। वीआरएस से दो दिन पहले उनके प्रपत्रों की जांच हुई थी। डॉ. विजय लक्ष्मी सेवानिवृत्त दर्शनशास्त्र विभाग डीएवी कॉलेज।

प्रपत्रों का सत्यापन करने में किसी शिक्षक को कोई आपत्ति नहीं है। जिनका रिटायरमेंट करीब है, उन्हें इससे अलग रखना चाहिए। सत्यापन बाद में भी किया जा सकता था। हां. सुनीत अवस्थी अध्यक्ष शिक्षक संघ डीएवी कॉलेज।

एक बार जब प्रपत्रों की जांच हो चुकी है तो दोबारा करने का क्या औचित्य है ।अभिलेख की प्रमाणिकता की दोबारा जांच करनी है तो यह जिम्मेदारी शासन की है। डॉ.बीडी पांडेय, अध्यक्ष कानपुर विवि शिक्षक संघ

छात्र छात्राओं को 30 वर्ष से पढ़ा रहे हैं। अभी तक 16 हजार से अधिक छात्रों को पढ़ाया है। अब प्रपत्र दिखाने को कहा जा रहा है। साल भर बाद रिटायरमेंट है। डॉ. ज्योति कुमार विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग वीपीएन कॉलेज

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