जब भी शिक्षामित्रों अनुदेशकों के मानदेय की ग्रान्ट जारी होती है तो सभी पेपरों मे इस तरह की न्यूज होती है जैसे सारा खजाना इन्ही को दे दिया हो
क्या कभी मीडिया ने ये दिखाया कि सरकार ने इनका बेतन ४०००० से घटाकर १०००० कर दिया
क्या ये दिखाया कि बेतन ४०००० से घटाकर १०००० करने से इनके २५०० साथी इस दुनिया को छोड़ गये
अभी तक क्या कभी अध्यापक लेखपाल ड्राइबर क्लर्क आदि बहुत से कर्मचारी हैं इनके बेतन का कभी जिक्र किया मीडिया ने कि इनका भी बेतन आ गया
क्या कभी इस बात का कभी जिक्र किया मीडिया ने कि जब इनसे अध्यापकों के समान काम चाहे बो शिक्षण कार्य हो प्रशिक्षण हो गणना हो चुनाव ड्यूटी हो अन्य जब सब समान तो इन्हे बेतन के नाम पर अल्प मानदेय क्यों


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