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उन्नाव:-निलंबित डीएम देवेंद्र पांडेय को कंपोजिट ग्रांट घोटाले में EOW ने माना दोषी, स्कूलों को खरीदे सामान में बड़ा घपला, शासन से की FIR दर्ज करने की सिफारिश

लखनऊ:

उन्नाव के निलंबित डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय पर कंपोजिट ग्रांट घोटाले में मुकदमा दर्ज होगा, EOW की जांच में दोषी पाए गए देवेंद्र पांडेय, EOW ने शासन से एफआईआर की सिफारिश की, दर्ज एफआईआर में धाराएं बढ़ाने की सिफारिश, स्कूलों को खरीदे सामान में बड़ा घपला किया, खरीदे सामान की कीमत कई गुना दिखाई थी, उन्नाव में 9.73 करोड़ की ग्रांट का घपला।

लखनऊ. उन्नाव (Unnao) के कंपोजिट ग्रांट घोटाले (Composite Grant Scam) में निलंबित चल रहे तत्कालीन डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय (IAS Devendra Kumar Pandey) को ईओडब्ल्यू (EoW) की जांच में भी दोषी पाया गया है. ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की संस्तुति की है. ईओडब्ल्यू ने शासन को भेजी रिपोर्ट में एफआईआर में देवेंद्र पांडेय का नाम जोड़ने और कुछ धाराएं बढ़ाने की संस्तुति भी की है. बता दें तत्कालीन डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय को कमिश्नर लखनऊ की जांच में भी दोषी पाया गया था. जिसके बाद शासन ने 23 फरवरी 2020 को डीएम उन्नाव देवेंद्र कुमार पांडेय को निलंबित करते हुए मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी थी.
बता दें ईओडब्ल्यू ने करीब डेढ़ माह पहले इस मामले में तत्कालीन डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय से गहन पूछताछ की थी. डीएम से पूछताछ के बाद जांच से जुड़े अन्य साक्ष्यों व दस्तावेजों को जुटाया गया. करीब छह माह की जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है. रिपोर्ट में देवेंद्र पांडेय को दोषी पाया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है. ईओडब्ल्यू ने दर्ज मुकदमे में आपराधिक धाराएं, निलंबित डीएम देवेंद्र पांडेय समेत कुछ अन्य आरोपितों के नाम बढ़ाए जाने की संस्तुति की है.

क्या है पूरा मामला?

कंपोजिट ग्रांट से उन्नाव जिले के 2,305 प्राइमरी और 832 जूनियर स्कूलों के लिए कुर्सी, मेज, टाट-पट्टी, शिलापट, चॉक, स्टेशनरी, बाल्टी, कूड़ेदान, मिड डे मील के बर्तन और खेल का सामान खरीदना था. इसके लिए 9.73 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट जारी की गई थी. कमिश्नर लखनऊ की जांच में यह बात सामने आई है कि उन्नाव के निलंबित डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय ने करीबी फर्मों से मिलीभगत करके स्कूलों के लिए खरीदे गए सामान की कीमत कई गुना दिखाई. फर्मों ने स्कूलों की मांग के मुताबिक सामान सप्लाई करने के बजाए मनमाना सामान भेजा. फर्जी बिल बनाए गए. कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएम देवेंद्र पांडेय को निलंबित कर दिया था.जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ कि जौनपुर की एक फर्म को ही ज्यादा ठेके दिए गए. इस फर्म का जीएसटी नंबर भी नहीं हैं. इस मामले की शिकायत सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन ने सीएम और राज्यपाल के यहां शिकायत की थी.


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