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छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के मूड में नहीं अभिभावक, जानिए क्या मंशा है अभिभावकों की

प्रदेश सरकार ने कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल 10 फरवरी और कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल एक मार्च से खोलने के निर्देश दिए हैं। सरकारी सिस्टम इसे लागू करने में जोरशोर से लगा है लेकिन निजी अंग्रेजी स्कूलों के अभिभावक अभी बच्चों को भेजने के मूड में नहीं है। स्कूलों ने सहमति पत्र के साथ 6 से 8 तक के बच्चों को भेजने को कहा है, लेकिन अधिकांश अभिभावक सहमति देने को तैयार नहीं।

अभिभावक कोरोना का टीका लगे बगैर बच्चों को स्कूल भेजने में रिस्क मान रहे हैं। इतना ही नहीं कक्षा 10 व 12 के बच्चों की प्री बोर्ड और 9 व 11 की वार्षिक परीक्षा तक अभिभावक ऑफलाइन दिलाने को राजी नहीं हैं। इस मसले पर हिन्दुस्तान ने शहर के प्रमुख स्कूलों के प्रधानाचार्यों और अभिभावकों से बात की। पेश है प्रतिक्रिया:

इनका कहना है

फिलहाल 6 से 8 तक की कक्षाएं शुरू करने पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। कक्षा 9 व 11 के बच्चों के ऑफलाइन एग्जाम के लिए अभिभावकों से सहमति मांगी है लेकिन वे रुचि नहीं ले रहे। 12वीं और 10वीं की प्री बोर्ड ऑनलाइन करानी पड़ी।

सिस्टर ज्योति, प्रिंसिपल सेंट मेरीज कान्वेंट

सरकार के आदेश के क्रम में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की कक्षाएं शुरू करने के लिए अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं लेकिन कोई तैयार नहीं है। यहां तक कि कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को ऑफलाइन एग्जाम दिलाने को राजी नहीं हैं। इसलिए जब तक सहमति नहीं मिलती, हमारी ऑनलाइन कक्षाएं पूर्ववत चलती रहेंगी।

सुष्मिता कानूनगो, प्रिंसिपल महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर

हमने आज ही 6 से 8 तक के छात्र छात्राओं के अभिभावकों को अपनी सहमति देने के लिए मैसेज किया है। अभिभावकों के राजी होने पर ही बच्चों को बुलाया जाएगा।

जया सिंह, प्रिंसिपल, डीपी पब्लिक स्कूल

अभी प्रतिदिन कोरोना के मरीज मिल रहे हैं। जनसामान्य का टीकाकरण भी नहीं हुआ है। इस स्थिति में बच्चों के लिए विद्यालय खोलना कहीं से भी उचित नहीं है।

भारतेंद्र त्रिपाठी, अभिभावक (पुत्र दीप त्रिपाठी कक्षा 9 सेंट जान्स एकेडमी करछना)

विद्यालय खोलने का निर्णय मेरी दृष्टि से उचित नहीं है। जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, यह रिस्क लेना समझ से परे है। स्कूलों में गाइडलाइन का पालन भी संभव नहीं हो पाएगा।

मधुलिका श्रीवास्तव (पुत्री महक श्रीवास्तव कक्षा 8 पतंजलि ऋषिकुल)

स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए स्कूलों में पढ़ाई लिखाई शुरू होनी चाहिए। घर पर पढ़ाई उस तरह से नहीं हो पा रही है।

सुनीत पांडेय (पुत्री संस्कृति पांडेय कक्षा 7 सेंट एंथोनी स्कूल)

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