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तबादले पर रोक का आदेश समाप्त, अब नए का इंतजार:- नीति स्पष्ट नहीं होने से कर्मचारियों और अधिकारियों में बनी असमंजस की स्थिति

प्रदेश के सरकारी कार्मिकों को स्थानांतरण सत्र 2021-22 के लिए तबादला नीति का इंतजार है। पर, नए सत्र के लिए किसी तरह का आदेश जारी न होने से उनमें असमंजस की स्थिति बनी है।

कार्मिक विभाग ने 12 मई 2020 को स्थानांतरण सत्र 2020-21 में कोरोना महामारी के चलते अग्रिम आदेशों तक स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी। शासन की यह व्यवस्था स्थानांतरण सत्र 2020-21 के समाप्त होने के साथ ही खत्म हो गई। स्थानांतरण सत्र 2021- 22 के लिए अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि परंपरागत स्थानांतरण की 31 मई की समयसीमा भी बीत गई। विभाग असमंजस में हैं कि 2020-21 के सत्र की समाप्ति के साथ ही तबादलों पर प्रतिबंध समाप्त हो गया। ऐसे में 29 मार्च 2018 के शासनादेश द्वारा चार वर्ष के लिए बनाई गई नीति 2021-22 में लागू हो गई या नहीं। इसी असमंजस में कुछ विभागों ने तबादले भी शुरू कर दिए। शिकायत पहुंचने पर कृषि निदेशक के स्तर से किए गए तबादलों को रद्द करने का आदेश देना पड़ा। कोषागार निदेशक ने नवचयनित प्रशिक्षित कार्मिकों की तैनाती का आदेश किया। इस पर वित्त विभाग ने पिछले स्थानांतरण सत्र में तबादलों पर रोक के आदेश का हवाला देते हुए इस तैनाती पर निदेशक कोषागार से जवाब तलब कर लिया।

विभागों में तबादलों और तैनाती में इस तरह की स्थिति कार्मिक विभाग द्वारा 2021-22 में स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट आदेश जारी न किए जाने की वजह से सामने आ रही है। कार्मिकों का कहना है कि शासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 2021-22 में स्थानांतरण होंगे या नहीं। दूसरा, अगर कोरोना से पैदा हुए हालात में और सुधार का इंतजार किया जाना है तो चालू स्थानांतरण सत्र में भी पिछले सत्र की तरह अगले आदेश तक रोक का आदेश हो जाना चाहिए। इससे किसी तरह का असमंजस नहीं होगा नीति स्पष्ट न होने से कार्मिक विभागीय अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों तक का चक्कर काट रहे हैं। बताया जा रहा है कि सक्षम स्तर से इस संबंध में निर्णय का प्रस्ताव चलाया गया था, लेकिन आदेश अभी तक जारी नहीं हो सका है।


सहूलियत से वंचित कार्मिक

वर्ष 2018 में चार वर्ष के लिए स्थानांतरण नीति जारी की गई थी। इसमें प्रावधान किया गया है कि दो वर्ष में सेवानिवृत्त होने वाले समूह 'ग' के कार्मिकों को उनके गृह जिले और समूह 'क' व 'ख' के कार्मिकों को उनके गृह जिले को छोड़कर इच्छित जिले में तैनात करने पर यथासंभव विचार किया जाए। जिससे इन कार्मिकों को अपने जिले या पड़ोसी जिले में रहकर अपने सेवानिवृत्ति देयकों को मंजूर कराने में आसानी हो सके।

दंपती कार्मिकों की मुश्किलें ज्यादा आईएएस व पीसीएस अधिकारियों के

प्रशासनिक आधार पर तबादले लगातार हो रहे हैं। पति-पत्नी दोनों सेवा में हैं तो एक जिले या पड़ोस के जिले में तैनाती का ख्याल रखा जाता है। पर, दो सत्र से तबादले न होने से आम पीसीएस अफसरों व अन्य कार्मिकों के तबादले नहीं हो पा रहे हैं। कई कार्मिकों की पारिवारिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि उन्हें सुविधाजनक तैनाती का बेसब्री से इंतजार है। सरकारी सेवा में कार्यरत तमाम दंपती अलग-अलग दूर के जिलों में कार्यरत हैं। ऐसे कार्मिकों को एक ही जिले या पास के जिलों में तैनाती की अर्जियां बढ़ती जा रही हैं।

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