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संकट में शिक्षामित्र:- शिक्षामित्रों के घर में जून में नहीं पकती है रोटी, 11 महीने की संविदा, जून का नहीं मिलता मानदेय

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत लगभग 1.50 शिक्षामित्रों के घर जून में रोटी नहीं पकती। लगभग बीस सालों से कार्यरत शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से 11 महीने का मानदेय ही मिलता है। बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षामित्रों को जून के महीने में मानदेय का भुगतान नहीं होता।
संविदा सेवा होने के कारण शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को एक महीने सेवा से बाहर माना जाता है। ये अलग बात है कि समाज कल्याण विभाग के अन्तर्गत आश्रम पद्धति विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को
प्रतिमाह लगभग 37000 रुपये के हिसाब से 11 माह एवं 29 दिन का मानदेय दिया जाता है।


प्रदेश में संविदा पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिकाओं को भी 12 माह का मानदेय दिया जाता है। वहीं यदि अन्य प्रदेशों की बात करें तो हरियाणा में कार्यरत गेस्ट टीचर, पंजाब के शिक्षा प्रोवाइडर, पश्चिम बंगाल के पैराटीचर्स आदि को 12 माह का मानदेय दिया जाता है। सिर्फ उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को 11 महीने का मानदेय मिलता है।
हमारी उत्तर प्रदेश सरकार से मांग है कि जीवन की परवाह किए बिना सरकार के आदेश के अनुपालन में पंचायत चुनाव में कोरोना से संक्रमित होकर सैकड़ों शिक्षामित्रों की मौत हो चुकी है। शिक्षामित्रों के परिवार आज भी जून की रोटी के लिए भी परेशान रहते हैं। इस समस्या का शीघ्र समाधान कर जून का मानदेय भी दिया जाए। कौशल कुमार सिंह, प्रदेश मंत्री उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ

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