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वेतन समिति की सिफारिशों पर विचार को समिति गठित, समिति के यह होंगे दायित्व

लखनऊ : सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में राज्य सरकार की ओर से गठित वेतन समिति (2016) की जिन सिफारिशों पर सरकार ने अभी निर्णय नहीं किया है, उन पर विचार करके कैबिनेट को अपनी सिफारिश करने के लिए शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
वित्त विभाग ने शुक्रवार को इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है।

प्रदेश सरकार ने राज्य वेतन समिति-2016 की विभिन्‍न संवर्गों व कर्मचारी संगठनों की मांगों के संबंध में दी गई संस्तुतियों पर कार्यवाही के लिए मुख्य सचिव समिति का गठन कर दिया है। वित्त विभाग ने शुक्रवार को समिति गठन का आदेश जारी कर दिया। तीन वर्ष से इस समिति के गठन का इंतजार था। 'अमर उजाला' ने इस समिति का गठन न होने से कर्मचारियों को रही पेरशानी का मामला प्रमुखता से उठाया था। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों पर बिचार के लिए राज्य बेतन समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी अंतिम संस्तुति फरवरी-2018 में सौंपी थी। सरकार ने समिति की कई सिफारिशों पर विचार कर कैबिनेट से निर्णय भी कराए। लेकिन समिति की विभागों व संगठनों के काडर पुनर्गठन, वेतनमान उच्चीकरण आदि से जुड़े प्रत्यावेदनों के संबंध में दी गई संस्तुतियों पर विचार नहीं किया गया। सामान्यतः पूर्व में वेतन समिति की संबर्गों से संबंधित सिफारिशों पर निर्णय के लिए मुख्य सचिव समिति का गठन किया जाता रहा है। पर, इस बार तीन वर्ष तक मुख्य सचिव समिति का गठन नहीं हो सका जिससे बेतन विसंगतियों, काडर पुनर्गठन आदि से जुड़ी मांगों पर कार्यवाही नहीं हों सकी। इससे कर्मचारियों में नाराजगी थी। 'अमर उजाला' ने बीते दो मार्च के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस खबर का संज्ञान लेकर मुख्य सचिव समिति की जानकारी तलब कर समिति के गठन के निर्देश दिए थे। बीच में पंचायत चुनाव से यह कार्यवाही प्रभावित हुई।

समिति में ये होंगे शामिल
समिति में मुख्य सचिव अध्यक्ष और
अपर मुख्य सचिव कार्मिक और
अपर मुख्य सचिव वित्त सदस्य
होंगे। इसके अलाबा संबंधित बिभागों
के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख
सचिव/सचिव भी सदस्य होंगे।
विशेष सचिव वित्त (वेतन आयोग )
के सदस्य सचिव होंगे।


समिति का दायित्व
मुख्य सचिव समिति राज्य वेतन
समिति-2016 की ऐसी सिफारिशों
पर विचार करेगी जिन पर अभी
निर्णय होना बाकी है। समिति पूर्व
प्रकरण पर विचार-विमर्श कर
अपनी संस्तुतियां कैबिनेट को देगी।
कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला
करेगी। इससे कर्मचारियों की वर्षों
से लंबित सेवा संबंधी प्रकरण पर
निर्णय का रास्ता साफ हो गया है।

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