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फर्जीवाड़ा में बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज कराने से परहेज, दो साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद नहीं दर्ज हुआ मुकदमा

सिद्धार्थनगर। बर्खास्तगी को दो वर्ष से अधिक समय गुजर गया, लेकिन फर्जी शिक्षकों पर केस दर्ज कराने के बजाए जिम्मेदार उन्हें वरदान दिए बैठे हैं। जबकि फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद ही कार्रवाई का आदेश जारी हुआ था। मगर जिम्मेदार एक-दूसरे पर ठिकरा फोड़ने में जुटे हैं। ऐसे में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने और बर्खास्तगी के बावजूद आरोपित घूम रहे हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े के मामले सामने आए थे।
वर्ष 2018 में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी के मामले जांच में सामने आए तो विभाग सवालों के घेरे में आ गया। यहां तक की फर्जीवाड़े के रैकेट के सरगना से के जुड़ा मामला होने के बाद बड़ी संख्या में गलत लोगों के चयन होने की आशंका को देखते हुए इस मामले की जांच एसटीएफ को दी गई थी।

जांच में वर्ष 2018-21 तक कुल 103 शिक्षक ऐसे में मिले, जिन पर फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल करने के आरोप लगे इनके मामले पकड़ में आए इसमें संबंधित ब्लॉक के बीईओ की ओर से तहरीर देकर इन आरोपितों पर मुकदमा दर्ज कराया जाना था। मगर विभागीय आंकड़े बताते हैं कि अब तक 90 पर ही केस दर्ज हुआ है। इसमें कई लोग गिरफ्तार होकर जेल गए और फिर जमानत पर छूट चुके हैं। वहीं 13 ऐसे आरोपित हैं, जिनके खिलाफ अब तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो कई बार संबंधित ब्लॉक बीईओ को केस दर्ज कराने के लिए पत्राचार भी हो चुका है। इसके बावजूद वे केस दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। ऐसा भी बताया जा रहा है कि जो 13 बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज नहीं कराया जा रहा है, उसके पीछे बड़े लोगों का दबाव है। 13 में पांच ऐसे आरोपित हैं, जो वर्ष 2018 फर्जीवाड़े के मामले में बर्खास्त हुए हैं। इस लिए बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू होने के बाद कई बीएसए आए चले गए, लेकिन इन आरोपितों पर कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में बीएसए राजेंद्र सिंह ने बताया कि सभी बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज कराने के लिए खंड शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

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