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जिले के 32 परिषदीय विद्यालय बाढ़ से घिरे, पढ़ाई ठप: बीएसए ने कही यह बात

श्रावस्ती। राप्ती में आई बाढ़ का असर केवल खेत व फसल पर ही नहीं पड़ा। बल्कि शिक्षण कार्य पर भी इसका असर पड़ा है। जिले के करीब 32 विद्यालय बाढ़ से घिरे हाने के कारण बंद हो गए। यहां शिक्षण कार्य पुन: प्रारंभ होने में हफ्तों का समय लग सकता है।
लगातार बारिश व नेपाल से पानी आने के कारण राप्ती नदी बुधवार रात तक खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही थी। यदि राप्ती बैराज के गेज पर नजर डाली जाए जो नदी बुधवार रात करीब 11 बजे तक 128.45 मीटर रही। जो खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर रहा। इसका असर फसल के साथ शिक्षण कार्य पर भी सीधे तौर पर देखने को मिला। बाढ़ से घिर जाने के कारण जमुनहा विकास खंड के करीब 15 विद्यालय, इकौना के 10 व हरिहरपुरानी के सात विद्यालय बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।

यहां आने जाने का कोई रास्ता नहीं है। कुछ विद्यालयों में तो बाढ़ का पानी अंदर घुस चुका है। जिसके चलते शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप है। यहां तक कि बाढ़ से प्रभावित स्कूलों को शिक्षण कार्य बंद रखने को कहा गया है। इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य तभी प्रारंभ हो पाएगा जब बाढ़ का पानी सूख जाएगा व रास्ता चलने लायक हो जाएगा। ऐसा होने में कई हफ्ते का समय लग सकता है।
इन विद्यालय में भरा बाढ़ का पानी, हुए बंद
विकास खंड जमुनहा - प्राथमिक विद्यालय गुढ़वा, प्राथमिक विद्यलय भौंसाव, संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय मिश्रपुरवा, संगमपुरवा, वीरपुर, उत्तमापुर, जोगिया पूर्वी, जोगिया, लक्ष्मनपुर सेमरहनिया, धोबिया, धूमबोझी दुर्गा के साथ प्राथमिक विद्यालय बड़ीबाग, नारायनजोत व पोदिला।
विकास खंड इकौना - कंपोजिट विद्यालय बगहा, मुश्काबाद, डिंगुराजोत, हजरिया, प्राथमिक विद्यालय कोटवा, झलुहिया व गनेेशीजोत बाढ़ के पानी के कारण बंद हैं।

जमुनहा व इकौना विकास खंड के कई स्कूलों में या तो बाढ़ का पानी भरा हुआ है या फिर चारों तरफ की जमीन पानी से डूबी हुई है। जिसके चलते यह विद्यालय अस्थाई रूप से बंद हैं। पानी निकलने के बाद ही यहां पठन पाठन की स्थिति बहाल हो पाएगी। -प्रभुराम, बीएसए

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