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बीएसए कार्यालय मं फर्जी नियुक्तियों की जांच से जुड़ीं फाइलों को सहेजते रहे कर्मचारी

देवरिया। जिले के दो अनुदानित विद्यालयों में मनमाने तरीके से की गई नियुक्तियों एवं वित्तीय मामले की जांच करने अपर निदेशक कोषागार गोरखपुर हरिशंकर मिश्रा बुुधवार को बीएसए कार्यालय के लेखा अनुभाग में पूरे दिन डटे रहे। इस दौरान लेखा अनुभाग के प्रवेश द्वार को आमजन के लिए बंद कर दिया गया था। कर्मचारी इन विद्यालयों से जुड़ीं फाइलों एवं रिकार्डों को ढूंढने में जुटे रहे।
गौरीबाजार के मदरसन स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय व सहदेव लघु माध्यमिक विद्यालय बाबू बभनी में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। नौ जुलाई को एसटीएफ प्रभारी गोरखपुर सत्यप्रकाश सिंह की तहरीर पर सदर कोतवाली में इस मामले में तत्कालीन लेखाधिकारी जगदीश लाल श्रीवास्तव सहित कुल 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसी बीच बीईओ बीरबल राम ने सदर कोतवाली में बीएसए कार्यालय का वर्ष 2010-11 का डिस्पैच रजिस्टर चोरी होने का मुकदमा 19 जुलाई को दर्ज कराया। जांच में पता चला कि डिस्पैच रजिस्टर का प्रयोग फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने में किया जाता है। 23 अक्तूबर को एसटीएफ ने पूर्व वित्त व लेखाधिकारी जगदीश लाल को गोरखपुर के गोलघर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उनसे जांच एजेंसी को मामले से जुड़ी कई अहम जानकारी भी मिली है। दोनो अनुदानित स्कूलों के वित्तीय मामलों की गड़बड़ियों की जांच के लिए बुधवार को अपर निदेशक कोषागार भी बेसिक कार्यालय पहुंच गए। बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि इन दोनो विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति और वित्तीय लेनदेन में कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर हेरफेर किया गया है। उन्होंने बताया कि लेखा अनुभाग के कर्मचारियों से संबंधित विद्यालयों से जुड़े रिकार्ड तलब किए गए हैं। कई रिकार्डों के गायब होने की भी बात सामने आई है। इसकी जांच के बाद तैयार रिपोर्ट को शासन स्तर पर अवगत कराया जाएगा।

बढ़ सकता है जांच का दायरा, अन्य अनुदानित विद्यालय भी आएंगे लपेटे में

जनपद के 70 अनुदानित विद्यालयों में शिक्षक व कर्मचारी पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इनके प्रबंधकों ने पूर्व में बीएसए और लेखाधिकारी रहे अधिकारियों से मिलीभगत कर मनमाने तरीके से नियुक्तियां कर सरकारी राजस्व को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। कई विद्यालयों में तो अधिकारियों के सगे संबंधी भी तैनात हैं। माना जा रहा है कि दो विद्यालयों की जांच के अंतर्गत ही अन्य विद्यालयों में हुई मनमानी नियुक्तियों पर उच्चाधिकारियों की नजर है।

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