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आसान नहीं पदोन्नति कोटा संशोधन की राह: राज्य शैक्षिक सेवा समूह- ख के उच्चतर पदों पर समूह -ग के खंड शिक्षाधिकारियों शिक्षक संघों को मंजूर नहीं

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह-ख के उच्चतर पदों पर निर्धारित पदोन्नति कोटा में संशोधन मुद्दे पर सुलह की राह दिख नहीं रही है। शासन के निर्देश पर पिछले दिनों शिक्षक संघों से सामंजस्य बैठाने में अधिकारी विफल रहे। बेसिक शिक्षा के समूह-ग के खंड शिक्षाधिकारियों की उच्चतर पदों पर पदोन्नति राजकीय शिक्षक संघों व महिला शाखा संघ को मंजूर नहीं है। पिछले दिनों एक महत्वपूर्ण बैठक में राजकीय
शिक्षक संघ पांडेय गुट की प्रांतीय अध्यक्ष छाया शुक्ला और महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने पदोन्नति कोटा संशोधन के प्रयास का विरोध किया। कहा कि राजकीय में शिक्षण, प्रशिक्षण और निरीक्षण के अलग-अलग संवर्ग है तो पदोन्नति भी अपने-अपने संवर्ग में ही होनी चाहिए। वर्तमान में खंड शिक्षाधिकारी का पद नाम समूह-ख उच्चतर शैक्षिक सेवा नियमावली में सम्मिलित ही नहीं है तो वह कोटा की मांग ही नहीं कर सकते। खंड शिक्षाधिकारी के पास शिक्षण का अनुभव नहीं है, जबकि समूह-ख उच्चतर के पदों पर सीधी भर्ती व पदोन्नति दोनों के लिए तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है। अगर शासन ने जबरन प्रयास किया तो मामला कोर्ट में ले जाएंगे। महिला शाखा इकाई की पदाधिकारियों ने भी राजकीय शिक्षक संघ का समर्थन किया। खंड शिक्षाधिकारी संघ समूह-ग से समूह-ख उच्चतर के पदों पर कोटा संशोधन कराकर पदोन्नति के दरवाजे खोलना चाहता है। राजकीय शिक्षक संघ भड़ाना गुट के अध्यक्ष सुनील कुमार भड़ाना और महामंत्री डा. रविभूषण के मुताबिक समूह ‘खÓ के पद वर्तमान में 50 प्रतिशत सीधी भर्ती तथा 50 प्रतिशत राजपत्रित शिक्षण पुरुष/महिला शाखा और निरीक्षण शाखा से निर्धारित अनुपात में पदोन्नति कर लोक सेवा आयोग करता है। समूह ‘खÓ के उच्चतर के पदों के लिए तीन साल का शिक्षण अनुभव आवश्यक है, जो कि खंड शिक्षाधिकारियों के पास नहीं है। ऐसे में यह पदोन्नति संशोधन कोटा मंजूर नहीं है।

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