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परिषदीय स्कूलों में बढ़े विद्यार्थी कम पड़ गईं पाठ्य-पुस्तकें, वितरण व्यवस्था में अव्यवस्था के कारण बढ़ गई है मुश्किल

प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों की सूरत बदलने की कोशिश जारी है। कायाकल्प योजना के तहत भवन, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी जैसे इंतजाम कराए जा रहे हैं। दूसरी तरफ पठन-पाठन की स्थितियां पहले जैसी हैं। अक्टूबर बीतने को है लेकिन सभी विद्यार्थियों के हाथ में निश्शुल्क दी जाने वाली किताबें अब तक नहीं पहुंच
सकी हैं। कहीं पुस्तक वितरण में अव्यवस्था है तो कहीं स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक होना है। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस संबंध में बेसिक शिक्षाधिकारी को पत्र लिखकर बताया है कि पिछले सत्र की छात्र संख्या के आधार पर पुस्तकें मंगाई गई थीं। इस बार बहुत से विद्यालयों में नामांकन बढ़ गया। उदाहरण के तौर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़गांव को देख सकते हैं। पिछले सत्र में 207 विद्यार्थी थे, इस बार यह संख्या 232 हो चुकी है। खास बात यह कि 207 बच्चों को भी सभी पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। खासकर पर्यावरण, खेल, स्वास्थ्य, स्काउट गाइड जैसी किताबों की उपलब्धता कम है। शिक्षक नेता ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ ब्लाकों में जिले से भेजी गईं किताबों की पहली खेप बीईओ स्तर से स्कूलों में भेजवाई गई। बाद में आने वाली किताबों को बीआरसी से ले जाने के लिए शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है। इसकी वजह से भी बच्चों को पुस्तक मिलने में कठिनाई आ रही है।

शिक्षकों पर बीआरसी से किताबें ले जाने का दबाव, पर्यावरण, खेल, स्वास्थ्य, स्काउट गाइड की किताबों की उपलब्धता कम है

कक्षा के अनुसार बौद्धिक स्तर सुधारना बड़ी चुनौती

शिक्षक नेता ब्रजेंद्र सिंह ने बीएसए को लिखे पत्र में बताया है कि पुस्तक के अभाव में विद्यार्थियों को पढ़ाना कठिन हो रहा है। इसकी वजह यह कि दो साल बाद विद्यार्थी स्कूल आए हैं। पिछले दो सत्रों में छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा और बिना तैयारी कराए अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया गया। प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में पहुंचे विद्यार्थियों के साथ अधिक कठिनाई हो रही है।

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