👇Primary Ka Master Latest Updates👇

अंग्रेजी में जाति प्रमाणपत्र देने में कोई रोक नहीं, शासनादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज

प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में अंग्रेजी भाषा में जाति प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर 10 मई व 21 मई 2019 को जारी शासनादेश सही करार देते हुए चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि
अंग्रेजी में जाति प्रमाणपत्र जारी करने पर संविधान में कोई रोक नहीं है। हिंदी के अलावा अंग्रेजी में भी प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है। कोर्ट ने जनहित याचिका को सस्ती लोकप्रियता के लिए दाखिल मानते हुए तीन हजार हर्जाना भी लगाया है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी व न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने जितेंद्र कुमार की याचिका पर दिया है।सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संविधान में प्रेसिडेंशियल आर्डर में अनुच्छेद-341 के अंतर्गत अनुसूचित जातियों की सूची हिंदी व अंग्रेजी भाषा में है। इसलिए हिंदी में ही जाति प्रमाणपत्र जारी हो, ऐसा नहीं किया जा सकता, जबकि अन्य राज्यों में अंग्रेजी में भी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। याची का कहना था कि यूपी में धंगड जाति को एससी का प्रमाणपत्र हिंदी में जारी होता है, क्योंकि प्रेसिडेंशियल आर्डर में धंगड लिखा है। जबकि अंग्रेजी में धांगर (dhangar) लिखा है। उनका कहना था कि अंग्रेजी का R(dhangar) एससी नहीं है। वह ओबीसी है। ऐसे में अंग्रेजी में जाति प्रमाणपत्र जारी करने से गलत लोगों को सर्टिफिकेट मिलने लगेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Politics news of India | Current politics news | Politics news from India | Trending politics news,