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प्रेरणा डीबीटी में उलझे बेसिक के शिक्षक, कैसे हो पढ़ाई

रामपुर।


परिषदीय स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म से लेकर जूते मोजे पहुंचाने की व्यवस्था को पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना शिक्षकों के लिए बड़ी उलझन बन गई है। बच्चों के अभिभावकों का ब्यौरा ऑन फीड करने में उनके पसीने छूटने लगे हैं। ऐसे में परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का काम लगभग ठप हो चुका है। शिक्षक अब एक सुर में फीडिंग का काम सीधे तौर पर उनसे वापस लेने की मांग करने लगे हैं।

परिषदीय स्कूल के बच्चों को सरकार की ओर से मिड डे मील, यूनिफार्म, जूते, मोजे मुफ्त में दिए जाते हैं,लेकिन इस योजना के संचालन में कई तरह की गड़बडी सामने आने के बाद अब शासन ने बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफार्म, जूते, मोजे व बैग की धनराशि भेजने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार की ओर से डीबीटी योजना लागू की है। इसके तहत बच्चों और उनके अभिभावकों का ब्यौरा एकत्र करना होगा और उसे ऐप पर ऑन लाइन फीड करना होगा। यह जिम्मा परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को सौंपा गया है। मगर, यह व्यवस्था अब शिक्षकों के गले की हड्डी बन गई है। शिक्षक इस काम में पूरी तरह उलझ कर रह गए हैं। शिक्षक मोबाइल व लैपटाप के जरिए प्रत्येक बच्चे का विवरण फीड करने में ऐसे उलझे हुए हैं कि स्कूलों में पढ़ाई का काम ठप हो गया है। ऐसे में शिक्षकों की दिक्कत बढ़ गई हैं। शिक्षकों ने एक सुर में इस कार्य को दूसरे कर्मियों से कराने की मांग शुरू कर दी है।

बोले शिक्षक
-डीबीटी का काम शिक्षकों के लिए चुनौती भरा है। इससे शिक्षकों को खासी दिक्कत हो रही है। शिक्षकों को इस कार्य से मुक्ति दिलानी चाहिए। तमाम शिक्षक ब्यौरा फीड करने में ही उलझे हैं। बहुत से शिक्षकों के पास एंड्रायड फोन भी नहीं है। ऐसे में दिक्कत होनी लाजिमी है।


डा.राजवीर सिंह

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