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बिना संसाधन परिषदीय शिक्षकों के लिए सिरदर्द बना डीबीटी

वाराणसी।
बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए इन दिनों काम का बोझ समस्या बना हुआ है। काम शैक्षणिक नहीं बल्कि शिक्षण से इतर ऑनलाइन डेटा फीडिंग का है। शिक्षकों का कहना है कि इस काम के लिए उन्हें न तो संसाधन दिए गए हैं न ही किसी प्रकार का प्रशिक्षण। स्कूल खुलने के बाद ऐसे काम तेजी से करने का दबाव भी लगातार बनाया जा रहा है। शिक्षकों के बीच अब विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं।


दरअसल प्रदेश सरकार ने कोरोना के बाद छात्रों को हर साल दिए जाने वाले स्कूल ड्रेस, जूते-मोजे, स्वेटर, बैग आदि की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराने की व्यवस्था की। इसे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) नाम दिया गया। मिडडे मील का वितरण राशन की दुकानों से हुआ तो कन्वर्जन कॉस्ट सीधे बच्चों के खातों में भेजी गई। स्कूल खुलने के बाद ड्रेस, बैग और अन्य सामानों की धनराशि भी खातों में भेजने के लिए डीबीटी के तहत छात्रों की डेटा फीडिंग कराई जा रही है। यह काम जिले के शिक्षकों के सुपुर्द कर दिया गया है। प्रेरणा पोर्टल पर शुरुआती समस्याएं आने के बाद इसका एप लांच कर दिया गया, ताकि शिक्षक अपने स्मार्टफोन से ही यह फीडिंग कर सकें। शिक्षकों में इस गैर शिक्षण कार्य को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सनत कुमार सिंह लगातार इसपर विरोध जताते रहे हैं तो प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ भी विरोध में उठ खड़ा हुआ है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि फीडिंग के नाम पर शिक्षकों से छुट्टी के दिन भी काम लिया जा रहा है और उन्हें जरूरी संसाधन और प्रशिक्षण भी नहीं दिलाया गया। दो दिन पूर्व शिक्षकों ने इसे लेकर हर खंड शिक्षाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। सोमवार को बीएसए से मिलकर शिक्षक इसे बंद करने की मांग करेंगे। दूसरी तरफ, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षकों से डीबीटी फीडिंग की व्यवस्था को शासन का आदेश बता रहे हैं।

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