👇Primary Ka Master Latest Updates👇

उधार के तेल-नमक से बन रहा बच्चों का मिड-डे-मील, परिवर्तन लगात बढ़ाने पर भी अब तक कोई निर्णय नहीं, चार लाख रसोइयों को सात महीने से नहीं मिला मानदेय, दशहरा के बाद दीपावली भी फीकी रहने की आशंका

उधार के तेल-नमक से बन रहा बच्चों का मिड-डे-मील, परिवर्तन लगात बढ़ाने पर भी अब तक कोई निर्णय नहीं

  • चार लाख रसोइयों को सात महीने से नहीं मिला मानदेय,
  • दशहरा के बाद दीपावली भी फीकी रहने की आशंका
  • 2021-22 शैक्षिक सत्र को अब तक नहीं मिली परिवर्तन लागत
  • शिक्षक उधार सामान लेकर बनवा रहे स्कूलों में खाना

प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में उधार के तेल, नमक और सब्जी से बच्चों का मिड-डे-मील बन रहा है। कोरोना काल की बंदी के बाद 24 अगस्त से उच्च प्राथमिक और एक सितंबर से प्राथमिक स्कूल खुल चुके हैं। लेकिन सरकार ने मध्याह्न भोजन बनाने के लिए परिवर्तन लागत का बजट जारी नहीं किया है।

कक्षा 1 से 5 तक के प्रत्येक बच्चे के लिए 4.97 रुपये और उच्च प्राथमिक स्कूल के प्रत्येक बच्चे के लिए 7.45 रुपये परिवर्तन लागत के रूप में मिलते हैं। इससे प्रधानाध्यापक गैस, सब्जी, दाल, तेल, नमक, मसाजा, सब्जी वगैरह का इंतजाम करते हैं। प्रत्येक बच्चे को हर सोमवार एक फल और बुधवार को दूध भी इसी पैसे से दिया जाता है।

परिवर्तन लागत न मिलने से प्रधानाध्यापक या तो उधार लेकर भोजन बनवा रह हैं या फिर अपने वेतन से खर्च कर रहे हैं। अप्रैल में हुए पंचायत चुनाव में जिन गांवों में नये प्रधान चुने गए हैं वहां शिक्षकों को और परेशानी हो रही है क्योंकि प्रधान मदद करने को तैयार नहीं हो रहे। पुराने प्रधान जानते हैं कि लेट-लतीफी से ही सही रुपया आ जाएगा तो वे सहयोग कर रहे हैं। मिड-डे-मील के जिला समन्वयक राजीव त्रिपाठी का कहना है कि शासन से बजट मिलते ही खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

परिवर्तन लगात बढ़ाने पर भी कोई निर्णय नहीं

केंद्र सरकार हर साल अप्रैल में परिवर्तन लागत का निर्धारण करती है। लेकिन इस बार अब तक नई दरें तय नहीं हो सकी है। एक अप्रैल 2020 के बाद इसका नया मानक नहीं तय किया गया। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि तबसे अब तक महंगाई आसमान छू रही है। ऐसे में महंगाई को देखते हुए परिवर्तन लागत में भी उसी अनुपात में वृद्धि होनी चाहिए।
  • चार लाख रसोइयों को सात महीने से नहीं मिला मानदेय,
  • दशहरा के बाद दीपावली भी फीकी रहने की आशंका
सूबे के चार लाख रसोइयों को भी सात महीने से मानदेय नहीं मिला है। रसोइयों को साल के 12 महीनों में से 10 महीने प्रतिमाह डेढ़ हजार रुपये मिड-डे-मील पकाने के लिए मिलते हैं। मानदेय न मिलने से दशहरा तो सूना बीता ही दीपावली भी फीकी रहने की आशंका है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Politics news of India | Current politics news | Politics news from India | Trending politics news,