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DBT का काम पूरा न होने से बिना यूनिफार्म स्कूल आ रहे बच्चे, हर अभिभावक के खाते में आएंगे 1100 रुपये

बांदा। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत यूनिफार्म, स्वेटर और जूते-मोजे की राशि भेजे जाने का शासनादेश लागू हुए एक महीना बीत गया, पर अब तक 67 फीसदी बच्चों के अभिभावकों का सत्यापन नहीं हो सका। छात्र-छात्राएं बगैर यूनिफार्म के घरेलू ड्रेस में स्कूल पहुंच रहे हैं।
जिले के परिषदीय स्कूलों में वर्तमान शिक्षा सत्र में 220248 बच्चे पंजीकृत हैं। जिले में 1725 विद्यालय हैं। इन बच्चों को जुलाई-अगस्त तक दो सेट में मिलने वाली यूनिफार्म अब तक नहीं मिल पाई है। इसी तरह अक्तूबर में वितरण होने वाले स्वेटर, जूते-मोजे, बैग भी नहीं मिले हैं।

20 सितंबर को जारी हुए शासनादेश में इस बार बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफार्म, स्वेटर और जूते-मोजे की धनराशि सीधे भेजने का फैसला लिया गया है, इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों के प्रमाणित आधार नंबर से संबंधित डाटा को पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) पोर्टल पर अपलोड करने का काम शुरू कर दिया है।
जिला समन्वयक सूर्य प्रकाश ने बताया कि एक लाख 21 हजार बच्चों के अभिभावकों का सत्यापन कर फीडिंग का काम पूरा कर लिया है। शेष का काम कराया जा रहा है। विभाग का दावा है कि जल्द ही धनराशि भेजने का काम भी शुरू होगा।
हर अभिभावक के खाते में आएंगे 1100 रुपये
शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल के प्रत्येक बच्चे को दो सेट यूनिफार्म (कीमत-600 रुपये), स्वेटर (200 रुपये), एक जोड़ी जूता व दो जोड़ी मोजा (125 रुपये), स्कूल बैग (175 रुपये) वितरित किए जाते थे। अब यह कुल 1100 रुपये अभिभावकों के खाते में सीधे भेजी जाएगी। अभिभावकों को खुद बच्चों के लिए यूनिफार्म मुहैया कराना होगी।

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