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12 लाख को नौकरियां, तीन लाख करोड़ निवेश: वित्त मंत्री खन्ना

लखनऊ : विधान मंडल के दोनों सदनों में शुक्रवार को वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए 8479.53 करोड़ रुपये के दूसरे अनुपूरक बजट और वित्तीय वर्ष 2022-23 के पहले चार महीनों में सरकार के जरूरी खचरें से निपटने के लिए 1,68,903.23 करोड़ रुपये के लेखानुदान को ध्वनि मत से पारित किया गया।
विधान सभा में अनुपूरक बजट का विरोध करते हुए नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार ने ‘सोच ईमानदार, काम दमदार’ का जो नया नारा दिया है, वह ‘सोच बेईमान, काम दागदार’ बनकर रह गया है। जवाब में संसदीय कार्य व वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि सरकार की लोकप्रियता का एक ही पैमाना है-लोकदृष्टि। उस पर योगी सरकार खरी उतरी है।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में अब तक 12 लाख लोगों को नौकरियां मिली हैं जबकि प्रदेश में तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। इनमें से 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश पर उत्पादन भी शुरू हो गया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि विपक्ष मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहा है। योगी सरकार में उप्र में कानून का राज स्थापित हुआ है। अपराध के आंकड़ों का जिक्र कर कहा कि उप्र में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। उन्होंने बताया कि उप्र में कोरोना से अब तक 22,915 मौतें हुई हैं जबकि प्रदेश की तुलना में कम आबादी वाले राज्यों में मौतों की संख्या कहीं ज्यादा है। प्रदेश में बेरोजगारी दर जो 2017 में 17 प्रतिशत थी, अब घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई है। योगी सरकार में 6,90,883 लोगों को नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिये नौकरियां मिलीं। वहीं रोजगार मेलों के जरिये 5,30,667 लोगों को नौकरियां मिलीं।

क्या यही रामराज्य है: अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान राम गो¨वद चौधरी ने कहा कि जब सरकार मूल बजट और पहले अनुपूरक बजट में आवंटित धनराशि का कई मदों में 50 प्रतिशत भी नहीं खर्च कर पाई है तो दूसरे अनुपूरक बजट का औचित्य क्या है। यह जनता के धन का दुरुपयोग है। सरकार राजस्व प्राप्तियों में भी फेल हुई है।

चौधरी ने कहा कि कोरोना प्रबंधन के नाम पर सीएम अपनी पीठ ठोकते हैं जबकि सर्वाधिक मौतें उप्र में हुईं। जब श्मशानों में जगह नहीं मिली तो लोग नदियों में लाश बहाने लगे। तब सरकार लाशों से कफन नोचवाने लगी। राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों को पेश करते हुए कहा कि उप्र में अपराध चरम सीमा पर हैं। रोजगार देने का दम भरने वाली सरकार ने बेरोजगार युवाओं को लाठियों से पिटवाया। पंचायत चुनाव में बहन-बेटियो का चीर हरण हुआ। सवाल किया कि क्या यही रामराज्य है? यह भी बोला कि ‘इस बार यूपी में बंगाल होगा।’

शिक्षामित्रों को मिले शिक्षकों के समान वेतन: बसपा नेता उमाशंकर सिंह ने शिक्षामित्रों को शिक्षकों के समान वेतन देने और शिक्षा प्रेरकों के बकाया मानदेय का भुगतान कराने की मांग की। बलिया के रसड़ा क्षेत्र में बंद सरकारी चीनी मिल को चालू कराने और जिले में ट्रामा सेंटर की स्थापना का मुद्दा भी उठाया।

गरीबों के साथ मजाक : कांग्रेस विधानमंडल दल नेता आराधना मिश्र ‘मोना’ ने कहा कि आसमान छूती महंगाई के दौर में सरकार की ओर से जरूरतमंदों की पेंशन 500 रुपये बढ़ाने का ऐलान गरीबों के साथ मजाक है।

महंगाई पर सरकार खामोश: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि निराश्रित पशुओं के कारण हो रहीं सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अनुपूरक बजट में कोई व्यवस्था नहीं है। किसानों की उपज की क्षति को रोकने का भी कोई इंतजाम नहीं है। सरकार मुफ्त राशन का ¨ढढोरा पीट रही है लेकिन महंगाई पर खामोश है। पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। वहीं, अपना दल (एस) की लीना तिवारी ने कहा कि उप्र कल्याणकारी योजनाओं के साथ कोरोना प्रबंधन में भी नंबर एक है।

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