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यूपी सरकार ने यूं ही नहीं मानीं मांगें, 69 हजार शिक्षक भर्ती पर फैसले की इनसाइड स्टोरी!

69 हजार बेसिक शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति के मसले पर प्रदेश सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। 2019 में हुई इस भर्ती को लेकर अभ्यर्थी आरक्षण में धांधली का आरोप लगाकर लगातार आंदोलन कर रहे थे। छात्रों ने विधानभवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों का समर्थन भी उन्होंने हासिल किया। पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी विसंगतियां सुधारने का आदेश सरकार को दिया था। वहीं विधान परिषद में भी इस मामले पर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। इसके बाद सरकार ने भर्ती में आरक्षण की विसंगतियां सुधारने का निर्णय लिया है।
सरकार का असमंजस और यह फैसला
एक ओर आरक्षण घोटाले का आरोप लगाकर ओबीसी, एससी और दिव्यांग अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे थे। दूसरी ओर सवर्ण अभ्यर्थियों का दबाव था कि जो भर्ती हो गई उसमें बदलाव न किया जाए। यही वजह है कि सरकार इस मामले को लेकर असमंजस में थी। अब दोनों को खुश करने का रास्ता निकाल कर आरक्षित वर्ग के 6,000 अभ्यर्थियों की भर्ती करने के साथ पहले और दूसरे चरण में खाली 17 हजार पदों पर नई भर्ती का निर्णय लिया गया है।

अब भी खुश नहीं आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी
इस निर्णय के बाद भी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी खुश नहीं हैं। आंदोलन कर रहे 69,000 भर्ती पीड़ित एससी-ओबीसी मोर्चा के अभ्यर्थी राजेश चौधरी कहते हैं कि सरकार मान रही है कि गड़बड़ हुई है तो जिन छह हजार को गलत भर्ती किया गया है, उन्हें निकाला जाए। हालांकि, आरक्षण में धांधली 18,000 से 20,000 पदों पर हुई है। ओबीसी में 27 की जगह सिर्फ 3.85 प्रतिशत आरक्षण मिला है। एससी को 21 की जगह 16.60 प्रतिशत आरक्षण मिला है। अभ्यर्थी जल्द कोर्ट जाएंगे।




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