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फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण में दंडात्मक कार्रवाई के बाद बहाल किए गए 73 शिक्षक

किसी को प्रतिकूल प्रविष्टि तो किसी की तीन वेतन वृद्धि रोकीं
मथुरा। 29000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया फर्जीवाड़े के चलते निलंबन हुए शिक्षकों की जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने दंडात्मक कार्रवाई के बाद बहाली कर दी है। इन्हें कुछ माह पहले ही शासन के निर्देश पर अनंतिम रूप से बहाल किया गया था, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप संबंधित शिक्षकों ने बीएसए पर लगाया है।

जनपद में एसआईटी की कार्रवाई के बाद फर्जी शिक्षक भर्ती से जुड़े विद्यालयों के 86 प्रधान अध्यापकों को निलंबित किया गया था। हालांकि लंबी अवधि के बाद इनकी शासन के आदेश पर अनंतिम बहाली कर दी गई। इसी दौरान शासन ने संबंधित शिक्षकों की बहाली के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए, जिनका अनुपालन जनपद में नहीं किया जा रहा था। इसके विरोध स्वरूप पिछले दिनों प्रभावित प्रधान अध्यापकों ने बीएसए कार्यालय पर धरना देते हुए प्रदर्शन किया था। इसी क्रम में बीएसए ने अब अनंतिम 73 शिक्षकों को दंडात्मक कार्रवाई के बाद बहाल किया है। 13 शिक्षक अभी भी बहाल नहीं किये गए हैं। बहाल किए गए शिक्षकों में कुछ की वेतन वृद्धि रोकी गई है तो किसी को चेतावनी जारी की गई है। अनेक को कठोर चेतावनी और प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी गई हैं। कई को उक्त कार्रवाई के बाद ही पूर्व विद्यालय में ही बहाल किया गया है। इस भेदभाव पूर्ण व्यवस्था को लेकर प्रभावित शिक्षकों में आक्रोश है।

वरिष्ठ शिक्षक नेता लोकेश गोस्वामी ने बताया बीएसए की भेदभाव पूर्ण कार्रवाई से शासन और विभागीय अधिकारियों को अवगत कराएंगे। निर्दोष शिक्षकों को बिना किसी कार्रवाई के बहाल करने के आदेश शासन ने दिए हैं। इसे लेकर आयोजित बैठक में सुनील वर्मा, दिनेश चंद, मोहन सिंह, वेद प्रकाश शर्मा, जय वीर सिंह, देवेंद्र शर्मा, दीवान सिंह, दिलीप कुमार, ब्रजेश रावत, अशोक बाबू, साधना सिंह, हेमलता सिंह, सावित्री मधुबाला, ललिता देवी, अलका कुलश्रेष्ठ, वीना शर्मा, नीलम सीमा घनश्याम नवल सिंह, विवेक, सत्यपाल आदि शिक्षक मौजूद रहे।


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