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मौसम ने ली करवट, बूंदाबांदी के बाद इस जिले में तीन दिन का स्कूलों में अवकाश घोषित

हापुड़। एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। रविवार को आसमान में बादल छाये रहे और प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। हालांकि देर शाम हुई बूंदाबांदी के बाद ठिठुरन बढ़ गई। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने कक्षा आठ तक के सभी स्कूलों के बच्चों के 29 दिसंबर तक अवकाश की घोषणा कर दी। इस दौरान शिक्षक स्कूल पहुंचेंगे और ऑन लाइन कक्षाएं लेंगे।
पिछले कुछ दिन ठिठुरन के बाद तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही थी। रविवार को सुबह से ही आसमान में बादल छा गए, जिसके कारण धूप हल्की रही। देर शाम बूंदाबांदी के बाद मौसम में ठिठुरन बढ़ गई। शीत लहर की आशंका के चलते जिलाधिकारी के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी अर्चना गुप्ता ने तीन दिन 27,28 और 29 दिसंबर तक सभी परिषदीय, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों के बच्चों के अवकाश की घोषणा की है। हालांकि बूंदाबांदी से प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई है। रविवार को जिले का अधिकतम एक्यूआई 390 दर्ज किया गया। यह स्तर मरीजों के साथ-साथ स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी बेहद खतरनाक है। चिकित्सकों के अनुसार पिछले पांच दिनों में सांस के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। चिकित्सकों का कहना है कि वायु प्रदूषण बढने के कारण श्वसन तंत्र में संक्रमण और अस्थमा से पीड़ित मरीज बढ़ रहे हैं। लोगों को आंखों में खुजली के साथ जलन महसूस हो रही है। इसके अलावा गले में खरास जलन और सिरदर्द की शिकायतें भी हो रही हैं।

चिकित्सक डॉ गौरव मित्तल का कहना है कि प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमण और एलर्जी की शिकायत हो सकती है। प्रदूषण स्वस्थ व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी खराब कर देता है। लोगों को लोगों को कोरोना संक्रमण के साथ-साथ बढ़ते प्रदूषण के स्तर से भी बचना होगा। प्रदूषण अधिक बढने से दिल के दौरे और स्ट्रोक की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
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प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए करें ये उपाय (Take these measures to reduce the effects of pollution)
  • प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए सुबह शाम बाहर जाने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क लगाकर ही निकलें।
  • ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करें और धूम्रपान न करें।
  • यदि कोई सांस का मरीज इन्हेलर ले रहा है तो उसे नियमित लेते रहें।
  • घर आने के बाद गुनगुने पानी से गरारे करें। जिससे प्रदूषित कणों के शरीर के अंदर जाने की संभावना को कम किया जा सके।
  • पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। बाहर से आने पर मुंह जरूर धोएं।
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इन रोगों के बढ़ रहे मरीज (Increasing patients of these diseases)
वायरल निमोनिया, अस्थमा और छाती में संक्रमण जैसे मरीजों के अलावा सांस लेने में कठिनाई, खांसी, बुखार, कफ , नींद न आने जैसी परेशानियां भी लोगों को हो रही हैं। इसके अलावा आंखों में जलन की भी लोगों को शिकायत हो रही है।

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