अलीगढ़ : अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव (assembly elections) हो रहे हैं। ऐसे में चुनाव के दौरान कौन-सा मुद्दा होना चाहिए और कौन-सी मांगें होनी चाहिए, जो चुनाव में छाए रहेंगे। इसी मुद्दे पर सरकारी व निजी विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी मांगों को लेकर बेबाक राय रखीं।
इन शिक्षक व शिक्षिकाओं का दर्द फूटा कि तकनीक के साथ उनकी तकलीफें बढ़ती जा रही हैं, जो आने वाली सरकार दूर करे। बोले, जिस तरह से वह वोट देना जानते हैं, उसी तरह सरकार बदलना भी। पुरानी पेंशन की बहाली, विद्यालयों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती, निजी शिक्षकों को सम्मान निधि, सरकारी व निजी विद्यालयों में समान पाठ्यक्रम, एक शिक्षा बोर्ड होने सहित अन्य मुद्दे रविवार को तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में अमर उजाला संवाद में आमंत्रित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उठाए।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (Uttar Pradesh Primary Teachers Association) के जिला मंत्री मुकेश कुमार सिंह ने पुरानी पेंशन की बहाली का मुद्दा उठाया। कहा, सरकार को इसे लागू करना चाहिए। यही चुनावी मुद्दा भी होगा। शिक्षा मित्रों व अनुदेशकों का मानदेय इतना हो, जिससे वह आसानी से भरण पोषण कर सकें। उन्होंने कहा शिक्षकों को शिक्षक ही रहने दिया। उनसे गैर शैक्षणिक कार्य न कराया जाए।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (national educational federation) के जिलाध्यक्ष डॉ. राजेश चौहान ने कहा कि शिक्षक केवल सरकार की नजर में एक उपकरण बनकर रह गए हैं। सरकारी महकमे में कर्मचारियों से एक बार हस्ताक्षर कराए जाते हैं, लेकिन शिक्षकों से रजिस्टर व मोबाइल पर कराया जाता है, उसका मिलान कराया जाता है, इससे शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचती है। शिक्षक को पुरानी पद्धति गुरुकुल दे देनी चाहिए, ताकि वह अच्छी तरह से बच्चों को आगे बढ़ाए। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षकों को सरकार ने 13 नंबर का रिंच समझ लिया है। सरकार को शिक्षा नीति में बेसिक विभाग के शिक्षक व अधिकारी को शामिल करना चाहिए, ताकि वह बेसिक शिक्षा (basic education) की दिक्कतों को समझ सकें। जिस तरह शिक्षकों को जिम्मेदार माना जाता है, उसी तरह अभिभावकों को भी माना जाए कि उनके बच्चे ने गृहकार्य क्यों नहीं किया।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ (Junior High School Teachers Association) के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने कहा कि आने वाली सरकार को पुरानी पेंशन की बहाली करनी चाहिए। वर्तमान सरकार से उन्हें शिक्षकों के लिए कोई उम्मीद नहीं है। शिक्षकों को एकजुट होना चाहिए। अगर एकजुट हो गए तो अपनी मांगों को मनवा लेंगे। जाति, क्षेत्र व संप्रदाय वाद में बंटने की जरूरत नहीं है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (national educational federation) के महामंत्री सुशील शर्मा ने कहा कि आगामी सरकार से उन्हें आशा है कि हर विद्यालय में खेल मैदान प्रदान करे। खेलकूद के लिए अनुदान बढ़ाए। हर विद्यालय को खेलकूद के लिए 10 हजार रुपये निर्धारित करे। निजी विद्यालय के शिक्षक पुरुषोत्तम ने कहा कि सरकार को निजी विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बारे में सोचना चाहिए।
वित्त विहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष देवराज शर्मा ने कहा कि वह 85% शिक्षा में सहयोग करते हैं। 85 फीसदी लोगों की तरफ सरकार नजर अंदाज किया जा रहा है। सरकार को निजी विद्यालयों को सहयोग करना चाहिए। शिक्षक रूम सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि कंपोजिट ग्रांट बढ़ाई जाए। खेल किट के लिए ग्रांट बढ़ाई जाए।
शिक्षक विश्वनाथ ने कहा कि मानवीय व भौतिक संसाधन शिक्षकों को उपलब्ध कराए जांय। शिक्षकों को तकनीकी आधारित प्रशिक्षण दिलाया जाए। टैबलेट व कंप्यूटर दिलाया जाए।
शिक्षक संजय भारद्वाज ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती की जाए। विद्यालयों को सरकार ने प्रयोगशाला बनाकर रखा गया है। शिक्षकों पर दबाव काफी है। सरकार के पास कोई योजना नहीं है, जिससे नुक्कड़ नाटक करके अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा सके।
शिक्षक संजय गुप्ता ने कहा कि तकनीक के साथ शिक्षकों की तकलीफें बढ़ती जा रहीं हैं, उसे सरकार दूर करे। लॉर्ड मैकाले ने जो शिक्षा व्यवस्था गड़बड़ की थी, उसे दुरुस्त किया जाए। वैदिक काल की परंपरा शिक्षा में प्रयोग होना चाहिए। शिक्षकों को केवल गुरु किया जाए, उसी नाम से भर्ती के पद भी निकाले जाएं।
शिक्षिका डॉ. संगीता राज ने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थी ज्यादा हैं, लेकिन उनके अनुपात में शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहिए।
शिक्षिका सुरभि ने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली होनी चाहिए। सरकार को अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित कार्यक्रम चलाना चाहिए।
शिक्षिका माहे जेहरा ने कहा कि गांव में पढ़ाने वाले शिक्षक व शिक्षिकाओं को प्रोत्साहन भत्ता दिया जाना चाहिए, ताकि गांव की तरफ उनका रुझान बढ़ सके। जूनियर की तरह प्राथमिक विद्यालय में भी फर्नीचर होना चाहिए। महिला शिक्षकों की सुरक्षा बढ़ाई जाए।
शिक्षिका ज्योति सिंह ने कहा कि कंपोजिट विद्यालय खत्म (Composite School Finished) किए जाए। प्राथमिक विद्यालय से प्रधानाध्यापक पद विस्थापित किया जाए।
SSD इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या अलका अग्रवाल ने कहा कि कोरोना काल में निजी विद्यालय संचालक व शिक्षकों को काफी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई सरकार को करना चाहिए।
HMSSD स्कूल की प्रधानाध्यापिका शालू वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को सम्मान निधि देना चाहिए। उन्होंने सरकार से कहा कि वह काम लें, लेकिन शोषण न करे। सरकार को उनके बारे में सोचना चाहिए।
वित्त विहीन विद्यालय प्रबंधक महासभा (School Manager General Assembly without finance) के महानगर अध्यक्ष अंतिम कुमार ने कहा कि बिना टीसी के विद्यालयों में प्रवेश दिला दिया गया, तो क्यों मान्यता दी जा रही है। हर विद्यालय संचालक को कोरोना काल में लाखों रुपये डूबे हैं। इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। सरकार को नर्सरी से ही पंजीकरण करना चाहिए।
वित्त विहीन शिक्षक महासभा (Financeless Teachers' Association) के संगठन मंत्री जितेंद्र कुमार ने कहा कि सभी शिक्षा बोर्ड (board of Education) एक किए जाएं। सरकारी व निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम एक समान होना चाहिए, ताकि सभी बच्चे एक समान शिक्षा हासिल कर सकें। मीडियम हिंदी व अंग्रेजी होनी चाहिए। बिजली बिल भी न्यूनतम होना चाहिए।
शिक्षक महेश चंद राजपूत ने कहा कि सरकार को अध्यापक के आगे सहायक नहीं लिखना चाहिए। सहायक होने के चलते वह हमेशा सरकार के टूल्स बने रहते हैं। सहायक शब्द उनके लिए घातक हो रहा है।
शिक्षिका प्रमिला आर्य ने कहा कि विद्यालयों से एआरपी व एसआरजी (ARP and SRG) पद खत्म होना चाहिए। वह परेशान करते हैं।

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