👇Primary Ka Master Latest Updates👇

बीते 5 साल में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों का न तो जिले के भीतर तबादला और न ही पदोन्नति

प्रयागराज : बीते पांच साल में बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का न तो जिले के भीतर तबादला हुआ और न ही पदोन्नति की आस पूरी हो सकी। बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने जिले के अंदर एक से दूसरे विकास खंड में तबादले के लिए कई बार आश्वासन दिया लेकिन वास्तविकता में कुछ नहीं हुआ।


पिछले साल 23 अप्रैल को मंत्री ने ट्वीट कर शिक्षकों के जिले के भीतर जल्द तबादले की बात कही थी। फिर उसके बाद सात अगस्त को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में अगस्त में ही स्थानान्तरण करने के निर्देश दिए लेकिन न तो शासनादेश जारी हुआ और न ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।

शिक्षकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनका पद जिला कैडर का होने के बावजूद 2016 के बाद से जिले के भीतर ट्रांसफर नहीं हुआ जबकि इन पांच सालों के दौरान गैर जिले के शिक्षकों को दो बार अंतर जनपदीय तबादले का लाभ मिला। पहले जिले के अंदर हर साल स्थानांतरण होता था लेकिन 2016 के बाद से स्थानांतरण नहीं हुए।

कुछ गिनती के शिक्षकों को पारस्परिक ट्रांसफर का लाभ मिला। इस दौरान शिक्षकों को पदोन्नति भी नहीं मिली। जिले में मार्च 2009 से नियुक्त हजारों शिक्षक पदोन्नति के इंतजार में है। बेसिक शिक्षा परिषद के नियमों के मुताबिक नियुक्ति के तीन साल बाद पदोन्नति होनी चाहिए।

लेकिन प्रयागराज में आखिरी बार 2016 में फरवरी 2009 तक नियुक्त शिक्षकों को ही पदोन्नति मिल सकी है। पदोन्नति न होने के कारण प्रत्येक शिक्षक को हर महीने औसतन चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर एक परिसर में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संविलियन कर देने से प्रधानाध्यापक के सैकड़ों पद कम हो गए। इससे शिक्षकों के पद्दोन्नति के अवसर भी कम हो गए।

इनका कहना है

पांच साल में सबसे अधिक शिक्षकों के हित प्रभावित हुए। जिले के अंदर स्थानांतरण पांच वर्षों से नहीं हुए जबकि पारस्परिक स्थानांतरण नई सरकार बनने के बाद दो बार हुए। शिक्षक का पद जिले कैडर का होता है। बाहरी जिलों से आए शिक्षकों से ज्यादा प्राथमिकता जनपद में पूर्व से नियुक्त शिक्षकों की होनी चाहिए किन्तु नियमावली के विरूद्ध अन्य जिलों से आए शिक्षक को प्राथमिकता दी गई।

अनिल राजभर, परिषदीय शिक्षक

जिले में मार्च 2009 से नियुक्त शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिल सकी है। हम लोगों का हर महीने औसतन चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। नियमत: तीन साल के बाद पदोन्नति होनी चाहिए। लेकिन हजारों शिक्षक ऐसे हैं जिनका प्रमोशन नियुक्ति के पांच से 12 साल के बाद भी नहीं हुआ।

दीपक मिश्र, परिषदीय शिक्षक

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Politics news of India | Current politics news | Politics news from India | Trending politics news,