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विभागीय लापरवाही से लटका तीन स्कूलों का ग्रांट, जाने पूरा मामला

गोरखपुर।विभागीय लापरवाही के चलते मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल वनटांगिया गांव समेत तीन विद्यालयों को तीन साल से कंपोजिट ग्रांट नहीं मिल पा रहा है। इन तीनों विद्यालय के शिक्षक योजना के मद में होने वाले सभी खर्च खुद उठा रहे हैं। शिक्षकों के अनुसार कई बार विभाग से शिकायत की गई मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं विभाग पहले तो इन तीनों विद्यालयों का कोड यूडायस पर लोड न होने का हवाला देता रहा और अब कोड लोड होने के बाद परियोजना निदेशक से अनुमति का इंतजार बता रहा है।

परिषदीय विद्यालयों में स्वच्छता, रंगाई-पुताई समेत शिक्षण सामग्री के लिए सरकार की तरफ से हर वर्ष छात्र संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट आवंटित किया जाता है। इसके लिए सभी विद्यालयों का कोड नंबर यूडायस पर अपलोड किया जाना था। वर्ष 2019-20 में जिन विद्यालयों का कोड यूडायस पर अपलोड हो गया परियोजना कार्यालय से उन सभी विद्यालयों को सीधे खाते में धन भेज दिया गया।

वनटांगिया गांव स्थित नंबर तीन कंपोजिट विद्यालय को तीन वर्ष, आजाद नर्सरी प्राथमिक विद्यालय और खाले टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय को दो वर्षों से धन नहीं मिला। शिक्षकों का कहना है कि जब तक इन विद्यालयों का कोड नहीं अपलोड था तब तक बगल के विद्यालयों में धन आवंटित किया जाता रहा। तीन वर्षों से क्यों बंद कर दिया गया या फिर भेजा गया तो वह धन इन तीनों विद्यालयों तक क्यों नहीं पहुंचा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। गौरतलब है कि वनटांगिया गांवों के विकास के लिए योगी आदित्यनाथ बतौर सांसद भी लड़ते रहे थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इन गांवों के विकास को प्राथमिकता में रखा। इसी क्रम में पांच प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण भी हुआ। अब विभागीय अफसरों की लापरवाही इन स्कूलों पर भारी पड़ रही है।

इस मद में मिलता है धन

पहले विद्यालयों को पांच से छह हजार रुपये हर वर्ष शिक्षण सामग्री, रंगाई-पुताई समेत अन्य मदों में दिए जाते थे। मगर अब यह रकम कंपोजिट ग्रांट के तहत छात्र संख्या के आधार पर दी जाती है। 01 से 30 छात्र संख्या पर विद्यालय को 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। अगर छात्रों की संख्या 100 है तो 25 हजार रुपये, 250 तक छात्रों पर 50 हजार, एक हजार छात्रों पर 75 हजार रुपये और इससे अधिक छात्र संख्या पर एक लाख रुपये दिए जाते हैं। इस रकम से 10 प्रतिशत साफ-सफाई (हैंडवाश, शौचालय, रंगाई-पुताई व टाइल्स) पर खर्च करना होता है। शेष 90 प्रतिशत रकम शिक्षण सामग्री, अनुश्रवण समेत अन्य मदों में खर्च करनी होती है।

अभी भी 2019-20 में अपलोड संख्या पर मिल रही रकम

मौजूदा समय में शिक्षण सत्र 2021-22 चल रहा है। मगर विद्यालयों को सत्र 2019-20 में अपलोड छात्र संख्या के आधार पर ही धन आवंटित किया जा रहा है। नियम यह है कि हर वर्ष यूडायस पर आकड़े अपडेट होने चाहिए साथ ही नये विद्यालय जिनका कोड बना है उनकी भी छात्र संख्या अपलोड होनी चाहिए। लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा यूडायस पर आकड़े अपडेट नहीं किए गए हैं।

वनटांगिया के पांच विद्यालयों समेत दो अन्य का कोड यूडायस पर अपलोड हो गया है। धन आवंटन के लिए परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। इन विद्यालयों का धन जिन विद्यालयों को भेजा जाता है। वहां भेजा गया है कि नहीं इसकी जांच करायी जाएगी। साथ ही यूडायस पर सत्र 2021-22 के लिए भी मार्गदर्शन मांगा गया है।

– रमेश चंद्र, जिला समन्वयक, निर्माण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग

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