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खेल बजट : पचास पैसे में कैसे तैयार होंगे ध्यानचंद और तेंदुलकर

बिजनौर। परिषदीय स्कूलों की खेल प्रतिभाओं को निखारने पर जोर तो दिया जा रहा है, लेकिन बजट किसी मजाक से कम नहीं है। जिले के लिए आए खेल बजट पर नजर डालें तो दो लाख 42 हजार विद्यार्थियों के लिए मात्र एक लाख 20 हजार का बजट आया है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस बजट में पचास पैसे में ध्यानचंद और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी तैयार कैसे करेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बजट के बंटवारे पर नजर डालें तो जिला स्तर की खेल प्रतियोगिता के लिए मात्र 60 हजार रुपये ही स्वीकृत हुए हैं। पांच हजार प्रति ब्लॉक के लिहाज से 60 हजार का बजट और दिया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता के लिए बेशक बड़ी धनराशि खर्च की जाती रही हो, मगर स्कूली स्तर से लेकर जिला स्तर तक खेल प्रतियोगिताओं को निखारने के लिए शासन भी बजट देने में कंजूसी करता रहा है। वर्तमान शिक्षा सत्र में जिले में करीब दो लाख 42 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इन छात्र-छात्राओं की न्याय पंचायत स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। लेकिन बजट की व्यवस्था शासन की ओर से नहीं की जाती।


वर्तमान शिक्षा सत्र में ब्लॉक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के लिए मात्र पांच हजार की व्यवस्था की गई थी। अक्टूबर महीने में ब्लॉक स्तर की खेल प्रतियोगिताएं शिक्षा विभाग के अधिकारियों व शिक्षकों ने मिल जुलकर करा ली थी। नवंबर के महीने में हुई जिला स्तर की खेल प्रतियोगिताएं भी अफसरों व शिक्षा विभाग की ओर से संपन्न तो कराई गई। लेकिन प्रशासन की ओर से खेल प्रतियोगिता के नाम पर बजट ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही प्राप्त हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग की मानें तो ब्लॉक स्तर के लिए पांच हजार रुपये की धनराशि तथा जिला स्तर के लिए 60 हजार रुपये की धनराशि शासन से आई है।

बढ़ना चाहिए खेलों का बजट

बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों का कहना है कि स्कूल स्तर से लेकर जिला स्तर तक की खेल प्रतियोगिताओं का बजट बढ़ना चाहिए। शासन की ओर से जो बजट मिलता है, वह बहुत कम है। व्यायाम शिक्षिका तरनजीत कौर का कहना है कि जिला स्तर के खिलाड़ियों को अच्छे पुरस्कार दिए जाने चाहिए। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि जिला स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के लिए शासन से आया बजट बहुत कम है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। कबड्डी खिलाड़ी रहे शिक्षक चंद्रपाल सिंह बताते हैं कि सभी खिलाड़ियों को कम से कम खेल किट उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे बच्चों में रुचि उत्पन्न होगी।

तीन महीने बाद आई धनराशि

बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से नवंबर के महीने में जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न करा ली गई थीं। जबकि अक्टूबर के महीने में ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताएं संपन्न हुई थीं। अब शासन की ओर से तीन महीने बाद खेल का बजट बेसिक शिक्षा विभाग को भेजा गया है। दूसरी ओर बीएसए जय करण यादव ने खेल बजट के रूप में ब्लॉक में जिला स्तर पर एक लाख 20 हजार रुपये की धनराशि आने की पुष्टि की है।

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