बिजनौर। शासन की बोर्ड परीक्षा की कक्ष निरीक्षक और परीक्षक नियुक्ति
में फर्जीवाड़ा रोकने की तैयारी है। इसके लिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव
किया जा रहा है। अब ऑनलाइन नियुक्ति होगी, अभी तक कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी
जिला स्तर व परीक्षकों की नियुक्ति बोर्ड कार्यालय होती है। डीआईओएस
कार्यालय में विद्यालयवार शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों के डाटा फीडिंग
का काम शुरू गया है।

जिले
के 387 माध्यमिक विद्यालयों के 90 हजार से अधिक हाईस्कूल व इंटर के
विद्यार्थी परीक्षा में पंजीकृत हैं। शासन बोर्ड परीक्षा में कक्ष
निरीक्षकों व परीक्षकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नए सिरे
से नीति निर्धारण में लगा है। डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार विद्यालयों को
कार्यरत शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों का डाटा बोर्ड की वेबसाइट पर
फीडिंग के निर्देश दिए गए हैं। फीडिंग के बाद सूची सत्यापित होगी। इसके बाद
सूची शासन को भेजी जाएगी। अगली प्रक्रिया शासन से होगी। अब तक विद्यालयों
से शिक्षकों की सूची डीआईओएस कार्यालय आती थी। डीआईओएस कार्यालय बोर्ड
परीक्षा के तय मानकों के आधार पर शिक्षकों की कक्ष निरीक्षक ड्यूटी लगाता
है। बोर्ड कार्यालय परीक्षकों की सूची मूल्यांकन केंद्रों को भेजता है।
शिक्षक जितेंद्र कुमार, बिजेंद्र सिंह का कहना है कि नियुक्ति में
पारदर्शिता लाना सही है, परंतु ऑनलाइन प्रक्रिया में व्यवहारिक परेशानियां आ
सकती है।
ये होता है फर्जीवाड़ा
शिक्षकों
पर शिक्षा सत्र के बीच में नौकरी छोड़ने के बाद भी परीक्षक बनकर नियम
विरुद्ध मूल्यांकन कार्य करने तथा ऐसे शिक्षकों के बारे में विद्यालयों
द्वारा बोर्ड कार्यालय को सूचित नहीं करने के आरोप लगते रहे हैं। साथ ही
संबंधित विषय की उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने का वांछित अनुभव नहीं होने या
फिर संबंधित विषय को नहीं पढ़ाने की शिकायत होती रही है। विद्यालयों द्वारा
सेवारत शिक्षक का शैक्षिक योग्यता व अनुभव आदि फीड करने के बाद डीआईओएस
द्वारा अभिलेखों का सत्यापन होने से तथ्यों की हेराफेरी पकड़ में आ सकेगी।
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