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PRIMARY KA MASTER: कारगर नहीं साबित हो रही डीबीटी योजना

लखीमपुरखीरी: बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को यूनीफार्म, स्वेटर, जूता, मोजा, बैग के लिए अभिभावकों के खाते में सीधे धनराशि भेजने की शासन की योजना कारगर साबित नहीं हो रही है। करीब डेढ़ महीने के बाद स्कूल खुलने पर तमाम छात्रों के पास यूनीफार्म तक नहीं है। जिस तरह से शासन द्वारा डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में बच्चों की सामग्री खरीदने के लिए पैसा भेजा जा रहा है।

इस मामले में अभिभावक भी गम्भीर नहीं है। स्कूल के शिक्षकों की मानें तो तमाम अभिभावक बच्चों के पैसों को दूसरे कामों में प्रयोग कर डाला है। पूछने पर आज कल में खरीद लेने की बात करते हैं। खाते में सीधे धनराशि भेजने की शासन की योजना को अभिभावकों ने गम्भीरता से नहीं लिया। यही वजह है कि अधिकांश बच्चे बिना ड्रेस के स्कूल आ रहे हैं। परिषदीय स्कूलों के काफी बच्चों को डीबीटी की राशि का अभी भी इंतजार है। बैकों द्वारा अभिभावकों के खातों को आधार से लिंक होना था। लेकिन अभी भी अलग-अलग बैंकों में बहुत से अभिभावकों के खाते आधार से लिंक नहीं हो सके। इससे ड्रेस, स्वेटर, जूता, मोजा आदि के लिए पैसा खातों में नहीं पहुंच पा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण करीब डेढ़ माह से बंद रहे स्कूलों को 14 फरवरी से खोल दिया गया। स्कूलों में पहुंच रहे तमाम बच्चों के पास न तो यूनीफार्म है और न ही जूता-मोजा। उक्त खातों को आधार से लिंक कराने के लिए शिक्षक भी बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि अभिभावकों के खातों में शत प्रतिशत धनराशि कब तक पहुंच पाती है। बीएसए लक्ष्मीकांत पांडे का कहना है कि स्कूल खुले हैं तो अब यह सर्वे किया जाएगा कि कितने अभिभावकों ने बच्चों को ड्रेस दिलाई या नहीं।

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