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हाईकोर्ट : अधिक अंक पाने वाली सहायक अध्यापक को अलीगढ़ में नियुक्ति का आदेश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायक अध्यापक भर्ती में क्वालिटी प्वाइंट अंक अधिक होने के बावजूद याची को वरीय जिला न देने के निदेशक बेसिक शिक्षा लखनऊ के आदेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने निदेशक के 19 जनवरी 2022 के आदेश को रद करके याची को वरीयता जिला अलीगढ़ आवंटित कर तीन हफ्ते में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने अंजू सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

अलीगढ़ में नियुक्ति मांगी मगर भेज दिया कासगंज

याचिका पर अधिवक्ता आरएन यादव व एके यादव ने बहस की। इनका कहना था कि याची को 70.08 क्वालिटी प्वाइंट अंक प्राप्त हुए हैं। नियुक्ति के लिए उसने अलीगढ़ जिला मांगा था। इसके बावजूद उसे कासगंज भेजा गया है, जबकि उससे कम क्वालिटी प्वाइंट अंक प्राप्त कई अभ्यर्थियों को अलीगढ़ में तैनाती दी गई है।

जवाबी हलफनामे में सरकार ने कहा कि ओबीसी महिला कोटे में अलीगढ़ में तैनाती के अंतिम अंक 71.17 है। वहीं, याची ने इसे गलत बताते हुए कहा कि सामान्य और ओबीसी के 68.21 व 67.42 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को अलीगढ़ आवंटित किया गया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने याची के इस कथन का जवाब नहीं दिया है। इसलिए निदेशक बेसिक शिक्षा का आदेश रद करते हुए याची की अलीगढ़ में नियुक्ति का निर्देश दिया है।

अग्निशमन अधिकारियों की प्रोन्नति पर निर्णय लेने का आदेश

प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फायर सर्विस में अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के पद पर 16 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वालों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को चीफ फायर आफिसर पद का वेतनमान ग्रेड पे रुपया 5400 देने पर डीजी फायर सर्विसेस लखनऊ विचार कर तीन माह में निर्णय लें। वेतनमान निर्धारण में प्रशिक्षण अवधि भी शामिल की जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अग्निशमन अधिकारी कुलदीप कुमार, ज्ञान प्रकाश शर्मा, संजीव कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है।याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम, अतिप्रिया गौतम व वीके मिश्र ने बहस की। इनका कहना था कि याचीगण की नियुक्ति वर्ष 1997 में फायर स्टेशन द्वितीय आफिसर के पद पर हुई थी। याचीगण को वर्ष 2008 में फायर स्टेशन आफिसर के पद पर प्रोन्नति प्रदान की गई। उन्हें न तो द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान रुपया 5400/-ग्रेड दिया जा रहा था, न ही उनके द्वारा की गई प्रशिक्षण की अवधि को सेवा में जोड़ा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम का तर्क था कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश 26 अगस्त 2015, तीन मार्च 2015, पांच नवंबर 2014 व 21 जुलाई 2011 के तहत वे सभी अग्निशमन अधिकारी जिन्होंने विभाग में 16 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है, उन्हें उनके द्वारा की गई प्रशिक्षण अवधि को जोड़ते हुए द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान 5400/- चीफ फायर आफिसर के पद का दिया जाना चाहिए। कहा गया था कि याची सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों का का लाभ भी पाने के हकदार हैं।

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