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सरकार ने मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान की

उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। देश में मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान बना दी है। अब सिर्फ पांच एकड़ के विकसित भूखंड पर ही मुक्त विश्वविद्यालय को खोलने की मंजूरी मिल जाएगी। अभी इसके लिए 40 से 60 एकड़ विकसित भूखंड होना जरूरी था। देश में मुक्त विश्वविद्यालयों के विस्तार की राह में यह एक बड़ी अड़चन थी। शहरी क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर भूमि मिलना मुश्किल था।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मुक्त विश्वविद्यालयों के लंबे समय से अटके कई प्रस्तावों पर मंथन के बाद यह फैसला लिया है। इसे लेकर अधिसूचना भी जारी हो गई है। वैसे भी मुक्त विश्वविद्यालयों को खोलने के मौजूदा नियम करीब 33 साल पहले यानी 1989 में तैयार किए गए थे। तब से यही प्रचलन में है। इस बीच इन्हीं अड़चनों के चलते देश में अब तक सिर्फ एक केंद्रीय मुक्त विश्वविद्यालय सहित करीब 14 मुक्त विश्वविद्यालय ही खुल सके हैं। यूजीसी के चेयरमैन डाक्टर एम जगदीश कुमार के मुताबिक, मुक्त विश्वविद्यालयों को खोलने से जुड़े नियमों को शिथिल करने से देश में मुक्त विश्वविद्यालय तेजी से खुलेंगे। इनकी पहुंच भी देश के कोने-कोने तक होगी। अभी देश का एक बड़ा वर्ग इसलिए भी उच्च शिक्षा से वंचित है, क्योंकि उच्च शिक्षा अभी भी उनकी पहुंच से काफी दूर है। साथ ही उनके पास संसाधन भी नहीं है।
यूजीसी ने मुक्त विश्वविद्यालयों के खोलने से जुड़े नियमों को शिथिल करने के साथ ही अन्य नियमों को यथावत रखा है। जिसमें फैकल्टी और दूसरी सुविधाएं शामिल हैं। यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। मुक्त विश्वविद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी होगी।

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