देवरिया। Teacher recruitment फर्जीवाड़े में एक साल पूर्व की गई शिकायत की जांच प्रक्रिया में भागलपुर क्षेत्र के एक प्रधानाध्यापक फंस गए हैं। सत्यापन प्रक्रिया में उनके BA and B.Ed के शैक्षिक प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इस पर बीएसए ने उन्हें निलंबित करते हुए सात दिनों के अंदर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। उधर, पांच अन्य शिक्षकों के खिलाफ जांच प्रक्रिया के तहत संबंधित universities एवं प्रशिक्षण संस्थानों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
पिछले साल भागलपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने जिलाधिकारी को शपथ देकर भागलपुर क्षेत्र के छह council teachers के खिलाफ फर्जीवाड़ा कर नौकरी करने की शिकायत की थी। इस संबंध में जिलाधिकारी की ओर से बीएसए को जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश हुए थे। मामले की जांच में पूरे एक साल बीत गए। अब एक प्रधानाध्यापक के BA and B.Ed के प्रमाणपत्र कूटरचित ढंग से तैयार पाए गए हैं।
इस संबंध में गोरखपुर विश्वविद्यालय ने जो रिपोर्ट दी है, उसके अनुसार प्राथमिक विद्यालय अंडिला के प्रधानाध्यापक जयप्रकाश तिवारी का स्नातक अनुक्रमांक 166496 वर्ष 1985 एवं बीएड अनुक्रमांक 6388 वर्ष 1990 का अंक व प्रमाणपत्र universities अभिलेख में किसी छात्र या छात्रा को आवंटित नहीं किया गया है।
BSA हरिश्चंद्र नाथ ने रविवार को बताया कि जयप्रकाश तिवारी, प्रधानाध्यापक द्वारा फर्जी एवं कूटरचित ढंग से स्नातक एवं बीएड के प्रमाणपत्रों के आधार पर षडयंत्र करते हुए नौकरी किए जाने की prima facie confirmation हुई है। आरोप सिद्ध होने पर भागलपुर क्षेत्र के अंडिला के प्रधानाध्यापक को अभी विभाग ने निलंबित करते हुए उन्हें बीआरसी से संबद्ध कर दिया है। इस प्रकरण की जांच के लिए beo भलुअनी को नामित किया गया है।
एक साल पूर्व की गई शिकायत, अब जांच में दिख रही तेजी
भागलपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पिछले वर्ष यहीं के प्राथमिक विद्यालय अंडिला, प्राथमिक विद्यालय सरया, प्राथमिक विद्यालय गोड़ौली, प्राथमिक विद्यालय बलिया दक्षिण, प्राथमिक विद्यालय अकूबा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय नरियांव में तैनात एक-एक शिक्षकों की शिकायत STF headquarter, लखनऊ एवं जिलाधिकारी से की थी। पहले तो विभागीय लोगों ने ही इन शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों को उपलब्ध कराने में ही लगातार लेटलतीफी की। शिक्षक को अब विभाग ने भले ही Suspended कर दिया हो, लेकिन जांच प्रक्रिया में लगातार लेटलतीफी अधिकारियों के रवैए पर सवाल खड़ा कर रही है।
सत्यापन प्रक्रिया में concerned board व universities से रिपोर्ट आने में देेरी होती है। जनपद स्तर से देर नहीं की जाती। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुुक्त हुुए शिक्षकों के खिलाफ शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया अभी चल रही है। भागलपुर के एक शिक्षक के शैक्षिक अभिलेख दोषपूर्ण मिले हैं, उन्हें Suspended कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है।


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