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विश्वविद्यालयों से निकल रही बेरोजगारों की फौज

उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों से बेरोजगारों की फौज निकल रही है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा-1) बीके मोहंती ने शुक्रवार को ‘उच्च शिक्षा के परिणामों की निष्पादन लेखा परीक्षा’ पर रिपोर्ट मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की। बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के साथ इनसे संबद्ध दस महाविद्यालयों के विस्तृत लेखा परीक्षा में यह बात सामने आई कि यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राएं रोजगार की दौड़ में पीछे रह जा रहे हैं।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 2016 से 2020 तक चार सत्रों में कुल 42 रोजगार मेला लगाए गए और 781 छात्रों का चयन हुआ। वहीं लखनऊ विवि में 13 रोजगार मेलों में 2692 छात्रों का कैंपस प्लेसमेंट हुआ। नमूना जांच से यह साफ हुआ कि राजकीय महाविद्यालयों में कैंपस प्लेसमेंट की संस्कृति नहीं है। यही स्थित दूसरे विश्वविद्यालयों की भी है।

पांच साल में चार लाख घट गई छात्रों की संख्या

प्रयागराज। प्रदेश के 18 राज्य विवि, 170 राजकीय महाविद्यालय, 331 अशासकीय सहायता प्राप्त और 6682 निजी महाविद्यालयों में 2015-16 में छात्र-छात्राओं की संख्या 94.88 लाख थी जो 2019-20 में घटकर 90.61 लाख हो गई। प्रति महाविद्यालय औसत नामांकन 2015-16 में 1830 से घटकर 2019-20 में 1261 रह गया।


सरकारी व निजी कॉलेजों में फीस का बड़ा अंतर

लखनऊ और काशी विद्यापीठ विवि द्वारा उनसे संबद्ध निजी महाविद्यालयों के शुल्क संरचना का अनुमोदन नहीं होने से राज्य विवि व सरकारी कॉलेजों की तुलना में निजी कॉलेजों की फीस में काफी अंतर था। कई पाठ्यक्रमों में तीन गुना तक फीस वसूली जा रही है।

मानकविहीन कॉलेजों को दे दी मान्यता

प्रयागराज। विश्वविद्यालयों ने मानक पूरा नहीं करने वाले निजी महाविद्यालयों को मान्यता दे दी। काशी विद्यापीठ के 28 निजी महाविद्यालयों में से 18 संबद्धता के चार से 29 प्रतिशत मानक पूरा नहीं करते।

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