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हाईकोर्ट का आदेश बना कॉरपोरेशन के लिए कवच,1400 की बर्खास्तगी और सात सौ का निलंबन नहीं हुआ वापस

लखनऊ। प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान हुई कार्रवाई की वापसी में हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन कवच बना रहा है। ऐसे में हड़ताल के दौरान बर्खास्त किए गए करीब 1400 संविदाकर्मियों और निलंबित किए गए सात सौ से अधिक नियमित अधिकारियों व कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई का मामला फंस गया है। कर्मचारी संगठन अब नए सिरे से आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।



प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति की ओर से हुई हड़ताल के दौरान विभिन्न निगमों के 1400 संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। कॉरपोरेशन एवं निगमों में कार्यरत करीब सात सौ से अधिक इंजीनियरों एवं कर्मचारियों को निलंबित कर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 22 नेताओं के खिलाफ एस्मा के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जबकि सात अन्य नेताओं पर अलग-अलग धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। करीब 65 घंटे चली हड़ताल के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की मौजूदगी में कॉरपोरेशन अफसरों और कर्मचारी नेताओं के बीच वार्ता हुई। इसमें ऊर्जा मंत्री ने कॉरपोरेशन के अध्यक्ष को निर्देश दिया कि सभी कार्रवाई वापस ली जाए।


अगले दिन रोक के बाद भी हड़ताल पर जाने की वजह से
कर्मचारी नेताओं और पॉवर कॉरपोरशन के अधिकारियों की इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेशी हुई। कॉरपोरेशन ने कार्रवाई के संबंध में हाईकोर्ट में शपथ पत्र दिया।




कर्मचारियों में बढ़ा आक्रोश, 28 को प्रदर्शन: प्रदेश में बिजली
कर्मियों की बर्खास्तगी और निलंबन वापस नहीं होने को लेकर कर्मचारी नेताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हड़ताल वापसी के दिन हुए समझौते का पालन कराने को लेकर अब बिजली कर्मियों के साथ विभिन्न संगठन भी लामबंद हो गए हैं और संयुक्त मंच का गठन कर लिया है। मंच के संयोजक अमरनाथ यादव ने बताया कि 28 मार्च को लखनऊ में विरोध प्रदर्शन कर कर्मचारियों की बर्खास्तगी और निलंबन वापस लेने की मांग की जाएगी।


गलत व्याख्या कर रहे हैं अफसर हाईकोर्ट ने 29 लोगों को
प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए वेतन एवं पेंशन भुगतान पर अंतरिम रोक लगाया है। जब्ती का आदेश नहीं दिया है। बर्खास्तगी, निलंबन और मुकदमा वापसी पर भी रोक नहीं लगाई है। इसके बाद भी कॉरपोरेशन के अफसर मनमानी कर रहे हैं। हड़ताल वापसी के दिन हुए समझौते का पालन नहीं कर रहे हैं। शैलेंद्र दुबे, संयोजक,विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति

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