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बाल वाटिकाओं में बच्चों के शिक्षण संग माताओं के प्रशिक्षण पर जोर

लखनऊः प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के साथ-साथ उनकी माताओं की भी कक्षाएं चल रही हैं। यहां हर महीने एक नई थीम पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बच्चों की माताओं को यह सिखाया जाता है कि वे अपने घर में बच्चों की सही परवरिश, पोषण और शिक्षा कैसे सुनिश्चित करें। इसके लिए बाल वाटिकाओं में माताओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है और नोडल टीचर भी इस अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

प्रदेश में कुल 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में 96 लाख बच्चे नामांकित हैं। इनमें से 95,619 आंगनबाड़ी केंद्र (बाल वाटिका) 70,494 परिषदीय और कंपोजिट विद्यालयों में संचालित हैं जिनमें तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के करीब 38 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बाल वाटिकाओं में पहली कक्षा में प्रवेश से पहले बच्चे को मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से पूरी तरह तैयार किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा की नींव घर में ही रखी जाती है और मां ही उसकी पहली शिक्षक होती है। इसलिए बाल वाटिकाओं में माताओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त किया जा रहा है। बच्चा घर और स्कूल दोनों जगह समान रूप से सीख सके, इसके लिए हर महीने निदेशालय की ओर से एक नई थीम भेजी जाती है। इसमें पोषण, सामाजिक संबंध, मौसम, स्वच्छता, भावनात्मक विकास जैसे विषयों पर केंद्रित गतिविधियां होती हैं। नोडल शिक्षक माताओं को यह सिखाते हैं कि वे इन विषयों को घर पर बच्चों को किस तरह से सिखा सकती हैं। बेसिक शिक्षा परिषद बाल वाटिकाओं को केवल शिक्षण का केंद्र नहीं बल्कि मातृत्व आधारित शिक्षण प्रयोगशाला बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए इन केंद्रों पर नियमित प्रशिक्षण, निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है।



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