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मर्जर
✍️राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाओं के लिए होती है। शिक्षा और स्वास्थ्य इसमें प्रमुखता से आते हैं। सरकारें हजारों तरह के हजारों तरीके से टैक्स लेती है। क्या शिक्षा भी व्यवसाय है, क्या सरकार प्रत्येक गांव में एक स्कूल नहीं चला सकती, वो भी असंतृप्त विद्यालय जहां प्राथमिक की पांच कक्षाओं में पांच शिक्षक आजतक सरकार नहीं दे पाई।
उन बच्चों का भविष्य अधर में आ गया है जो दो दो तीन किलोमीटर जाकर पढ़ाई लिखाई नहीं कर सकते, हो सकता है यदि वे पढ़ लिख लें तो अच्छे-अच्छे पद पा सकते थे।
एक तरह से ये भ्रूण हत्या है। लेकिन शून्य संख्या वाले विद्यालयों में पहले समीक्षा होनी चाहिए थी फिर ये बंद करने का निर्णय लेना चाहिए था। कोर्ट में 51 बच्चे खड़े थे वास्तव में वे हार गए और आगे भी जनता ऐसे ही हारती रहेगी। क्यों कि न्याय, समानता, शिक्षा, .... हजारों शब्द कानून के अलंकार है जो पुस्तकों तक सीमित है। सबको नौकरी नहीं मिलती वे महाराष्ट्र जाते हैं वहां बिहारी यूपी वाला कहकर पीटे जाते हैं।
क्या फर्क पड़ता है राजा रावण हो या राम
जनता सीता ही कहलाएगी।
यदि राजा होता है रावण तो सीता हरी जाएगी, और यदि होता है राजा राम तो सीता की अग्निपरीक्षा ली जाएगी।....
ये गरीबी न हटे तो गरीबों को मार दो वाली कहावत लग रही है।

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