👇Primary Ka Master Latest Updates👇

मृतकों को मतदाता कैसे बनने दें: सीईसी

बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर आलोचनाओं का सामना कर रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने गुरुवार को पहली बार अभूतपूर्व कदम उठाते हुए कई सवाल उठाए हैं। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने पूछा, क्या आयोग किसी प्रभाव में आकर मृत, स्थायी रूप से पलायन कर चुके या कई जगहों पर दर्ज लोगों के नाम सूची में शामिल करने की अनुमति दे सकता है?


उनकी यह टिप्पणी विपक्ष द्वारा बिहार की मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर बढ़ते हमलों के बीच आई है। विपक्ष का दावा है कि इससे करोड़ों पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।

एक महीने का समय मिलेगा: आयोग ने बताया है कि एसआईआर के निर्देशों के अनुसार, किसी भी मतदाता या किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को 1 अगस्त से 1 सितंबर तक एक महीने का समय मिलेगा ताकि वे निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और पार्टियों के बूथ लेवल एजेंटों द्वारा छूट गए पात्र का नाम शामिल करवा सकें।

अपात्र लोगों को अनुमति देना संविधान के खिलाफ

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, क्या निर्वाचन आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया से बन रही शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव-मजबूत लोकतंत्र की नींव नहीं है? पहले बिहार में और बाद में पूरे देश में अपात्र लोगों को वोट देने की अनुमति देना संविधान विरुद्ध है। इन सवालों पर, किसी न किसी दिन, हम सभी और भारत के सभी नागरिकों को राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर गहराई से सोचना होगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Politics news of India | Current politics news | Politics news from India | Trending politics news,