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खुद की नौकरी खतरे में शिक्षक कैसे बनाएंगे दूसरों का भविष्य, जब अपना ही नहीं सुरक्षित

इटावा। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने आदेश दिया है। इससे जनपद के प्राइमरी व जूनियर में करीब दो हजार शिक्षक ऐसे है जिन्होंने टीईटी परीक्षा पास नहीं की है। ऐसे में उनकी नौकरी पर संकट के बादल छा गए हैं। उधर, अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बेसिक शिक्षाधिकारियों से टीईटी न करने वाले शिक्षकों की सूची तलब की है।


नए आदेश के बाद टीईटी न करने वाले शिक्षक नौकरी को लेकर खासे परेशान हैं। जनपद में पांच हजार से अधिक शिक्षक प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हाल ही में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विभाग सहित शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि प्राइमरी की टीईटी में बीपीएड वाले आवेदन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में वह कैसे टीईटी करेंगे। जो शिक्षक प्रमोशन या समायोजन के बाद जूनियर स्कूलों में पहुंच गए हैं वह टीईटी करके नौकरी बचा सकते हैं।

2008-09 के 60 हजार, 28 हजार की भर्ती के बीएड डिग्री धारक प्राइमरी शिक्षक व जिनकी नियुक्ति 2010 के पूर्व हुई है वह शिक्षक प्रभावित होंगे। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने बताया कि जिले में दो हजार से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने टीईटी परीक्षा पास नहीं की है। ऐसे में इन शिक्षकों की नौकरी पर कभी भी गाज गिर सकती है।

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