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प्रयोगशाला बिना स्कूल नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र, यूपी बोर्ड केंद्र निर्धारण नीति में करने जा रहा है प्रावधान

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 में केंद्र निर्धारण को लेकर नियम-कानून सख्त होने जा रहे हैं। बोर्ड की ओर से शासन को केंद्र निर्धारण नीति के लिए जो प्रस्ताव भेजा जा रहा है उसमें उन स्कूलों को केंद्र नहीं बनाने की सिफारिश की गई है जहां प्रयोगशाला नहीं है या जहां कि प्रयोगशाला क्रियाशील नहीं है। विज्ञान वर्ग की मान्यता वाले स्कूलों में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की प्रयोगशालाएं होना आवश्यक है।


वहीं, मानविकी वर्ग की कक्षाएं संचालित करने वाले जिन स्कूलों में कंप्यूटर, भूगोल और गृह विज्ञान विषय पढ़ाया जा रहा है वहां इन विषयों की प्रयोगशालाएं होनी चाहिए। बोर्ड को शिकायत मिली है कि कई स्कूलों में विषय की मान्यता तो है लेकिन या तो प्रयोगशाला ही नहीं है या फिर वह क्रियाशील नहीं है। तमाम प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरण, केमिकल्स वगैरह की खरीद नहीं होती और उनमें बच्चों ने कई साल से कदम नहीं रखा है। ऐसे में बच्चों को सैद्धांतिक ज्ञान भले ही दिया जा रहा हो लेकिन प्रयोगात्मक ज्ञान से पूरी तरह से वंचित हैं। जबकि मान्यता की शर्त में क्रियाशील प्रयोगशाला होना आवश्यक है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से प्रयोगशाला को केंद्र निर्धारण के लिए आवश्यक शर्त बनाए जाने की संस्तुति की जा रही है। 2025 की बोर्ड परीक्षा में प्रयोगशाला को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं थे।

2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने वाले स्कूलों को भी केंद्र निर्धारण में वरीयता देने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल 18 सितंबर को केंद्र निर्धारण नीति जारी हो गई थी। इस साल कक्षा 10 और 12 के पंजीकरण पूरे हो चुके है और 20 सितंबर तक वेबसाइट पर ऑनलाइन त्रुटि संशोधन हो रहा है।

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