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सीतापुर के स्कूल में तीन बच्चे बेहोश हो गए, बीएसए से मारपीट पर मंत्री ने की जांच की मांग

सीतापुर। चर्चित बीएसए-शिक्षक विवाद में हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिक्षामित्र और एआरपी ने विद्यालय समय से खोल दिया। बच्चे विद्यालय तक गये लेकिन पढ़ने को राजी नहीं हुए। बच्चों व अभिभावकों ने प्रधानाध्यापक के समर्थन में प्रदर्शन किया। गर्मी के चलते तीन बच्चे गश खाकर बेहोश हो गये।


बीएसए से मारपीट पर मंत्री ने की जांच की मांग: सीतापुर के बीएसए के साथ मारपीट प्रकरण में उठा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। शिक्षक संगठनों के बाद इस विवाद में प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री भी कूद पड़े हैं। प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। श्री पटेल ने इस संबंध में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह से फोन पर बात भी की है।

बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा है कि सीतापुर का शिक्षक प्रकरण बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

शिक्षक बृजेंद्र वर्मा कर्मठ, ईमानदार और नियमित विद्यालय जाने वाले शिक्षक थे, उनको इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने आपा खो दिया। मात्र 20 सेकंड की वीडियो क्लिप के आधार पर शिक्षक को एक तरफा दोषी करार देना न्यायोचित नहीं है।

बीएसए ऑफिस में प्रवेश करने से लेकर अंत तक की सारी सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन के आधार पर जो भी दोषी हो, उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर वहां कौन सी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, जिससे एक शिक्षक मारपीट करने पर मजबूर हुआ। इसकी सच्चाई सामने आना चाहिए। श्री पटेल ने यह भी लिखा है कि इस संबंध में उनकी बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से बात हुई है और उन्होंने स्पष्ट कहा है घटना की निष्पक्ष जांच होगी और प्रकरण में जो भी दोषी होगा उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों ने भी बेसिक शिक्षा निदेशक व स्कूल शिक्षा महानिदेशक से लेकर शासन तक को पत्र भेजकर कहा है कि उन्हें जिले स्तर से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। शासन स्तर से इसकी विस्तृत उच्च स्तरीय जांच की जाए तथा पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी की पूरी फुटेज सार्वजनिक की जाए। इस बीच शुक्रवार को पूरे दिन सीतापुर के बीएसए को निलम्बित किए जाने की चर्चा बेसिक शिक्षा जगत में होती रही लेकिन देर शाम तक निलम्बन से जुड़ा कोई आदेश सामने नहीं आया। अलबत्ता इस मामले में उच्चाधिकारी भी कुछ भी बोलने से बचते रहे।

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