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कई मतदाता सूचियों में नाम वाले नहीं लड़ सकते चुनाव

● सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की अपील खारिज कर लगाया जुर्माना

राज्य निर्वाचन आयोग जारी किया था स्पष्टीकरण

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण परिपत्र में कहा गया था कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन पत्र केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा कि उसका नाम एक से अधिक ग्राम पंचायत/प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों/नगरपालिका की मतदाता सूची में शामिल है।

नई दिल्ली, । कई मतदाता सूचियों में नाम वाले व्यक्ति को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की अपील खारिज कर दी और दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से कहा कि आप वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ निर्णय कैसे दे सकते हैं?

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण परिपत्र पर रोक लगा दी थी। आयोग ने इसी परिपत्र के जरिए राज्य में हो रहे पंचायत चुनाव में कई मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हम हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत निर्णय कैसे दे सकते हैं? पीठ ने हाईकोर्ट के उस निष्कर्ष को सही बताया जिसमें कहा गया था कि कई मतदाता सूचियों में नाम वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति देना कानून के खिलाफ है। इससे पहले, मामले में प्रतिवादी व यचिकाकर्ता शक्ति सिंह भरतवाल की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी और स्निग्धा तिवारी ने आयोग की अपील का विरोध किया और पीठ से कहा कि कई मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव में लड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

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