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आरटीई से जुड़े फैसले पर पुनर्विचार हो, टीईटी सेवानिवृत्ति का लाभ मिलेगा

नई दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में पांच जजों की संविधान पीठ द्वारा 'प्रमाटी एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट' मामले में पारित उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया कि आरटीई अधिनियम 2009 अल्पसंख्यक स्कूलों, चाहे वे सहायता प्राप्त हों या गैर-सहायता प्राप्त, पर लागू नहीं है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने कहा, 'हम सम्मानपूर्वक अपनी शंका व्यक्त करते हैं कि क्या प्रमाटी मामले में सही ढंग से निर्णय लिया गया है?' इसके साथ ही, पीठ ने इस मामले को देश के प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई के समक्ष भेजते हुए इन मुद्दों की पड़ताल के लिए सात जजों की संविधान पीठ गठित करने का आग्रह किया है। पीठ ने कहा कि हमारी राय में पांच जजों की संविधान पीठ द्वारा इस मामले में कुछ भूल हुई है।

टीईटी सेवानिवृत्ति का लाभ मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में शिक्षक टीईटी पास करने में विफल रहे तो नौकरी छोड़नी होगी। हालांकि, उन्हें सेवानिवृत्ति का सभी लाभ मिलेगा। शीर्ष अदालत ने इसमें एक शर्त जोड़ा है कि अंतिम लाभों की अर्हता के लिए, ऐसे शिक्षकों को नियमानुसार अर्हक सेवा अवधि पूरी करनी होगी। यदि किसी शिक्षक ने अर्हक सेवा पूरी नहीं की तो सरकार के उपयुक्त विभाग द्वारा विचार किया जा सकता है।

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