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टीईटी की अनिवार्यता पर विरोध के बीच तैयारी में जुटे शिक्षक

लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के आदेश

के बाद कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य हो गया है। इस निर्णय के बाद शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर राहत की मांग कर रहा है, लेकिन कई शिक्षक अब मान चुके हैं कि केवल विरोध से कुछ नहीं होगा, इसलिए उन्होंने टीईटी की तैयारी शुरू कर दी है। वाट्सएप ग्रुपों पर इस समय शिक्षक टीईटी पाठ्यक्रम के आधार पर सामान्य ज्ञान और अन्य विषयों से संबंधित सामग्री साझा कर रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से अधिक है, उन्हें हर हाल में टीईटी देना होगा, अन्यथा उनकी नौकरी समाप्त हो सकती है। वहीं, पदोन्नति चाहने वाले शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी कर दिया गया है। शासन ने 29 और 30 जनवरी को शिक्षक पात्रता परीक्षा की तिथियां प्रस्तावित की हैं। आवेदन की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होने वाली है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षक पढ़ाई में जुट गए हैं। उनका मानना है कि समय रहते तैयारी करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह ने भी शिक्षकों से अपील की है कि वे समय बर्बाद किए बिना पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई शुरू कर दें। गौरतलब है कि इससे पहले शिक्षामित्रों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों को फिर से शिक्षामित्र बनना पड़ा था।

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